कर्नाटक, 29मई| कर्नाटक में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदलता नजर आ रहा है। राज्यपाल थावरचंद्र गहलोत द्वारा मुख्यमंत्री पद से सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसके बाद सिद्धारमैया के दिल्ली पहुंचने और कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात की खबरों ने चर्चाओं को और बढ़ा दिया है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली दौरे के दौरान सिद्धारमैया ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की, जिसमें राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल रहे। इस बैठक में उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया भी मौजूद बताए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया ने पार्टी हाईकमान के सामने नई सरकार और संगठन से जुड़े कई सुझाव और राजनीतिक अपेक्षाएं रखीं। इनमें उनके बेटे यतींद्र के लिए नई सरकार में महत्वपूर्ण विभागों की मांग भी शामिल है। चर्चाओं के मुताबिक चिकित्सा शिक्षा, पिछड़ा वर्ग कल्याण, उद्योग या जल संसाधन जैसे विभागों पर विचार किया गया है।
इसके अलावा, राज्यसभा और एमएलसी चुनावों को लेकर भी संभावित नामों पर चर्चा हुई है, जिन्हें सिद्धारमैया ने नेतृत्व के सामने रखा।
दूसरी ओर, कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने और संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव भी रखा है। हालांकि, बताया जाता है कि उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने और राज्यसभा जाने से अनिच्छा जताई है।
इसी बीच, कर्नाटक में नई सरकार के गठन और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी चर्चा तेज है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि सरकार में तीन उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं, जिनमें एससी, एसटी और लिंगायत समुदायों से प्रतिनिधित्व देने पर विचार किया जा रहा है।
