Herbal Products : वन धन विकास केंद्र ने बदली आदिवासी महिलाओं की तकदीर… डोंगनाला का हरिबोल समूह बना महिला सशक्तिकरण की मिसाल

Herbal Products : वन धन विकास केंद्र ने बदली आदिवासी महिलाओं की तकदीर… डोंगनाला का हरिबोल समूह बना महिला सशक्तिकरण की मिसाल

रायपुर, 31 मई। Herbal Products : छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी वन धन विकास केंद्र योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से कोरबा जिले के कटघोरा वन प्रभाग अंतर्गत डोंगनाला की आदिवासी महिलाओं ने आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की नई कहानी लिखी है। डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह आज हर्बल उत्पाद निर्माण के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है।

दिहाड़ी मजदूरी से उद्यमिता तक का सफर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन मंत्री श्री केदार कश्यप की मंशा के अनुरूप 12 आदिवासी महिलाओं से गठित यह समूह कभी दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर था। सीमित आय और रोजगार के अभाव में परिवार का भरण-पोषण कठिन था, लेकिन वन धन विकास केंद्र योजना से जुड़ने के बाद इन महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।

प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग से मिली नई पहचान

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपज की संभावनाओं को देखते हुए महिलाओं को संगठित किया गया। उन्हें आयुर्वेद विशेषज्ञों तथा छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद सहकारी संघ द्वारा हर्बल प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

हर्बल उत्पादों की बाजार में बढ़ी मांग

प्रशिक्षण के बाद समूह ने त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, हर्बल फेस पैक, हर्बल हेयर पाउडर और टूथ पाउडर जैसे उत्पादों का निर्माण शुरू किया। गुणवत्ता और प्रभावशीलता के कारण इन उत्पादों की स्थानीय और संस्थागत बाजारों में लगातार मांग बढ़ी।

आयुष विभाग से मिला बड़ा अवसर

समूह की मेहनत को बड़ी सफलता तब मिली जब उन्हें आयुष विभाग से हर्बल उत्पादों की आपूर्ति का बड़ा ऑर्डर प्राप्त हुआ। इस ऑर्डर से समूह को लगभग 20 लाख रुपये का लाभ हुआ, जिससे उनकी पहचान और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

38.90 लाख रुपये का लाभ अर्जित

वित्तीय वर्ष 2024-25 में हरिबोल स्वयं सहायता समूह ने लगभग 38.90 लाख रुपये का लाभ और कमीशन अर्जित किया। इससे समूह की महिलाओं और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तथा जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

26 करोड़ रुपये से अधिक की संचयी बिक्री

वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक वन धन विकास केंद्र डोंगनाला ने लगभग 26.11 करोड़ रुपये की संचयी बिक्री दर्ज की है। यह उपलब्धि समूह की मेहनत, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और प्रभावी विपणन रणनीति का परिणाम मानी जा रही है।

महिलाओं की आय में हुआ बड़ा इजाफा

इस पहल के माध्यम से समूह की प्रत्येक सदस्य की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.7 लाख रुपये तक पहुंच गई है। आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति भी मजबूत हुई है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

हर्बल प्रसंस्करण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए हरिबोल स्वयं सहायता समूह को ट्रायफेड और छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान समूह की उपलब्धियों और समर्पण का प्रमाण है।

अन्य स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणा

डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह इस बात का उदाहरण है कि शासन की योजनाएं, कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और बाजार की उपलब्धता मिलकर ग्रामीण एवं आदिवासी महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। आज यह समूह प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर के स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है।

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