रायपुर, 27 फरवरी। New Education Policy : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नई शिक्षा व्यवस्था के तहत कक्षा 6 से तीन भाषाएं पढ़ाना अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के प्रावधानों के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की जाएगी।
दो भारतीय भाषाएं जरूरी
नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को कक्षा 6 से तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। अंग्रेजी को विदेशी भाषा की श्रेणी में रखा गया है, जिससे छात्र अंग्रेजी के स्थान पर फ्रेंच या जर्मन जैसी अन्य विदेशी भाषा का चयन कर सकेंगे। हालांकि, इसके साथ दो भारतीय भाषाएं पढ़ना जरूरी होगा।
CBSE द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस बदलाव के लिए नए पाठ्यक्रम, पुस्तकें और मूल्यांकन प्रणाली भी तैयार की जाएगी। तीसरी भाषा में छात्रों के ज्ञान और कौशल का स्तर तय किया जाएगा, ताकि वे पढ़ने, लिखने और बुनियादी संवाद की क्षमता विकसित कर सकें।
2031 की 10वीं बोर्ड में शामिल हो सकती है तीसरी भाषा
बताया जा रहा है कि इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा और वर्ष 2031 की कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा को शामिल किए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो विद्यार्थियों को तीन भाषाओं में परीक्षा देनी पड़ सकती है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस नीति का उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी क्षमता विकसित करना, भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और वैश्विक भाषाई प्रतिस्पर्धा के लिए उन्हें तैयार करना है।
नीति का उद्देश्य
छात्रों को अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों की समझ देना। भाषाई लचीलापन और संचार कौशल को बढ़ाना। बहुभाषी नागरिक बनाने में मदद करना, जो सामाजिक, अकादमिक और भविष्य की प्रतिस्पर्धा के लिए उपयोगी हों।