Success Story : मेहनत और योजनाओं का संगम…संतोषी बाई बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

Success Story : मेहनत और योजनाओं का संगम…संतोषी बाई बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर, 14 अप्रैल। Success Story : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम बघमरा की संतोषी बाई विश्वकर्मा ने यह साबित कर दिया है कि यदि मेहनत और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सही समन्वय हो, तो जीवन में बड़ा परिवर्तन संभव है। पारंपरिक लोहारी कार्य से जुड़ी संतोषी बाई आज न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बनकर उभरी हैं।

पारंपरिक हुनर को बनाया आजीविका का मजबूत आधार

संतोषी बाई और उनके पति वर्षों से लोहारी का कार्य करते आ रहे हैं। वे कृषि उपयोगी औजार जैसे कुदाल, टंगिया (कुल्हाड़ी) और हंसिया बनाते हैं। आधुनिक तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बावजूद उन्होंने अपने पारंपरिक व्यवसाय को जीवित रखा है। उनके बनाए औजारों की स्थानीय किसानों के बीच अच्छी मांग है, जो उनकी गुणवत्ता और मेहनत को दर्शाता है।

शासन की योजनाओं से मिला आर्थिक संबल

भूमिहीन कृषि मजदूर के रूप में जीवन यापन कर रही संतोषी बाई को शासन की योजनाओं ने नई दिशा दी।

  • दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत उन्हें प्रतिवर्ष 10,000 रुपये की सहायता मिल रही है।
  • महतारी वंदन योजना से उन्हें हर माह 1,000 रुपये की राशि प्राप्त हो रही है।

इन आर्थिक सहयोगों ने उनके जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाया है।

कच्चे से पक्के घर तक का सफर

पहले संतोषी बाई का परिवार कच्चे मकान में रहता था, जहां सुरक्षा और स्थायित्व की कमी थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें पक्का और सुरक्षित आवास मिला, जिससे उनके जीवन में स्थिरता और सम्मान का भाव आया।

सम्मान और आत्मविश्वास में हुआ इजाफा

संतोषी बाई ने बताया कि शासन की योजनाओं ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। अब वे आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ सामाजिक रूप से भी सशक्त महसूस करती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने उन्हें सुरक्षा, स्थायित्व और सम्मान प्रदान किया है। संतोषी बाई की कहानी यह संदेश देती है कि परंपरागत कौशल और सरकारी सहयोग के साथ कोई भी व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सकता है। आज वे अपने गांव और आसपास की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

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