Cultural Heritage : ज्ञानभारतम् मिशन के सर्वेक्षण में मिली 400 वर्ष पुरानी पांडुलिपि… 16वीं शताब्दी की कल्चुरीकालीन धरोहर

Cultural Heritage : ज्ञानभारतम् मिशन के सर्वेक्षण में मिली 400 वर्ष पुरानी पांडुलिपि… 16वीं शताब्दी की कल्चुरीकालीन धरोहर

रायपुर, 25 मई। Cultural Heritage : भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञानभारतम् मिशन” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत कोरबा जिले में भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण हेतु व्यापक कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में जिले को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सफलता प्राप्त हुई है।
ज्ञानभारतम् मिशन के सर्वेक्षण में मिली 16वीं शताब्दी की कल्चुरीकालीन 400 वर्ष पुरानी पांडुलिपि

पुराने राजमहल में मिली दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि

ज्ञानभारतम् मिशन के जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह के नेतृत्व में 23 मई 2026 को किए गए सर्वेक्षण के दौरान कोरबा के रानी रोड स्थित पुराने राजमहल राजगढ़ी में 16वीं शताब्दी की कल्चुरीकालीन लगभग 400 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि का पता चला। यह अमूल्य धरोहर कोरबा की अंतिम शासिका स्वर्गीय रानी धनराज कुंवर देवी के नाती कुमार रविभूषण प्रताप सिंह के निवास में संरक्षित पाई गई।

27 प्राचीन पांडुलिपियों का हुआ दस्तावेजीकरण

सर्वेक्षण के दौरान श्रीमद् भागवत पुराण और सुखसागर बारहवां स्कंध सहित धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व की कुल 27 प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों का पता लगाया गया। जिला समन्वयक द्वारा मौके पर ही “ज्ञानभारतम् ऐप” के माध्यम से इन सभी पांडुलिपियों का फोटो अपलोड कर उनका डिजिटल संरक्षण किया गया।

इतिहासकारों ने की ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि

इस अवसर पर सतीश प्रकाश सिंह ने पांडुलिपियों के ऐतिहासिक स्वरूप की पुष्टि के लिए वरिष्ठ इतिहासकार एवं भाषाविद रामेंद्रनाथ मिश्र से चर्चा की। पांडुलिपियों से संबंधित ऐतिहासिक जानकारियों और संदर्भों को भी डिजिटल रूप से सुरक्षित किया गया।

जर्जर अवस्था में मिली अमूल्य धरोहर

जानकारी के अनुसार ये पांडुलिपियाँ मोटे पुराने कागज़ पर काली स्याही से देवनागरी और संस्कृत भाषा में हस्तलिखित हैं। लंबे समय से सुरक्षित रखे जाने के कारण अब इनकी स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है। कागज़ छूने पर टूटने लगते हैं, इसलिए इन्हें लाल कपड़े में लपेटकर पूजा घर में सुरक्षित रखा गया था। लगभग 20 वर्षों बाद पहली बार इन्हें खोला गया।

धार्मिक आयोजनों में होता था उपयोग

सतीश प्रकाश सिंह ने बताया कि पुराने राजपरिवार के समय इन पांडुलिपियों का उपयोग धार्मिक आयोजनों में वाचन के लिए किया जाता था। इसके अलावा अंग्रेजी शासनकाल में 19वीं शताब्दी के कोलकाता छापाखाने से प्रकाशित स्कंद पुराण की लगभग 300 पृष्ठों की एक ऐतिहासिक प्रति भी प्राप्त हुई है, जिसका डिजिटल संरक्षण किया गया है।

ज्ञानभारतम् मिशन के माध्यम से कोरबा के पुराने राजपरिवार में संरक्षित इन धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का राष्ट्रीय स्तर पर अभिलेखीकरण किया गया है। डिजिटल स्वरूप में संरक्षित ये दुर्लभ पांडुलिपियाँ अब आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहेंगी और भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य विरासत के रूप में संरक्षित की जाएंगी।

राज्य खबर