रायपुर, 17 अप्रैल। Herbal Farming : वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश और बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा हर्बल खेती को बढ़ावा देने के लिए नवाचार योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य ग्रामीण किसानों, विशेषकर महिलाओं की आय बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
चारागाह बन रहे औषधीय खेती के केन्द्र
योजना के तहत पंचायतों के चारागाहों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। बाजार की मांग को देखते हुए बच, ब्राह्मी, पचौली, पामारोजा, खस और लेमनग्रास जैसे पौधों का चयन किया गया है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिल सके।
पचपेड़ी गांव बना मॉडल
धमतरी जिले के पचपेड़ी गांव में इस योजना का सफल मॉडल सामने आया है, जहां लगभग 5.5 एकड़ चारागाह भूमि पर महिला स्व-सहायता समूह द्वारा औषधीय पौधों की खेती की जा रही है। इसमें बच, लेमनग्रास, पामारोजा, खस, ब्राह्मी और पचौली जैसे पौधों का रोपण किया गया है।
महिलाओं को प्रशिक्षण और संसाधन
औषधि पादप बोर्ड द्वारा महिलाओं को इस खेती का प्रशिक्षण दिया गया और निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराए गए। समूह आधारित इस पहल ने महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर दिया है।
प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में उभर रहा मॉडल
पचपेड़ी का यह चारागाह अब केवल उत्पादन केन्द्र नहीं, बल्कि प्रशिक्षण और सीखने का प्रमुख केन्द्र भी बन गया है। आसपास के गांवों के किसान यहां आकर औषधीय खेती की तकनीक सीख रहे हैं और इसे अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार की तैयारी
इस सफल मॉडल को देखते हुए जल्द ही धमतरी जिले के कोटगांव में भी इस तरह की खेती शुरू की जाएगी। यह पहल चारागाहों के बेहतर उपयोग के साथ ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा कर रही है।
यह नवाचार योजना न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है, बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है, जिससे गांवों में आत्मनिर्भरता और विकास को नई गति मिल रही है।

