MGNREGA : नारायणपुर में फलदार क्रांति का नया अध्याय… मनरेगा ने किसानों के खेतों को बनाया आम के बागों में

MGNREGA : नारायणपुर में फलदार क्रांति का नया अध्याय… मनरेगा ने किसानों के खेतों को बनाया आम के बागों में

रायपुर, 12 जून।  MGNREGA : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत नारायणपुर जिले में शुरू की गई एक अभिनव पहल अब ग्रामीण विकास और कृषि समृद्धि का सफल मॉडल बनकर उभर रही है। ओरछा जनपद की ग्राम पंचायत कुंदला के आश्रित ग्राम बासीन में किसानों के खेतों में लगाए गए फलदार वृक्षों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। हालिया निरीक्षण में यहां लगाए गए लगभग 99 प्रतिशत पौधे जीवित और स्वस्थ पाए गए हैं, जिससे यह पहल किसानों की आय बढ़ाने और हरित विकास को गति देने का प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।

आम के ग्राफ्टेड पौधों से किसानों के भविष्य को मिली नई दिशा

मनरेगा के तहत स्वीकृत नर्सरी में उद्यान विभाग द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफ्टेड आम के पौधे तैयार किए गए, जिन्हें वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान चयनित किसानों के खेतों में रोपित किया गया। इस योजना का उद्देश्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्रदान करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार वृक्षों के विस्तार को सुनिश्चित करना भी है। आने वाले वर्षों में यही पौधे किसानों की अतिरिक्त आय का मजबूत आधार बनेंगे।

सिर्फ पौधे नहीं लगाए गए, उनकी सुरक्षा और देखभाल की भी बनी मजबूत व्यवस्था

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक वर्ष तक रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। उद्यान विभाग ने किसानों को सामूहिक फेंसिंग (बाड़बंदी) की सुविधा उपलब्ध कराई, जिससे पौधों को पशुओं और अन्य नुकसान से बचाया जा सके। वहीं किसानों ने भी सिंचाई, निगरानी और नियमित देखभाल में सक्रिय भागीदारी निभाकर योजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

किसानों की मेहनत और विभागीय समन्वय का नतीजा, 99 प्रतिशत जीवितता दर

क्षेत्रीय निरीक्षण में दर्ज 99 प्रतिशत जीवितता दर इस बात का प्रमाण है कि जब किसानों की भागीदारी और विभागीय समन्वय प्रभावी हो, तो योजनाएं जमीन पर शानदार परिणाम देती हैं। यह उपलब्धि न केवल नारायणपुर जिले के लिए गर्व का विषय है, बल्कि अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में आम उत्पादन के माध्यम से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ने से पर्यावरणीय संतुलन को भी लाभ मिलेगा।

‘रोजगार के साथ हरियाली और आय वृद्धि’ का सफल उदाहरण बना बासीन

ग्राम बासीन की यह पहल ग्रामीण विकास की उस अवधारणा को साकार करती है, जिसमें रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय वृद्धि एक साथ जुड़ी हुई है। मनरेगा के माध्यम से तैयार किया गया यह मॉडल अब अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है और यह साबित कर रहा है कि सही योजना, प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदली जा सकती है।

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