रायपुर, 8 जून। प्रदेश में ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद 16 जून से स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है। ऐसे में निजी स्कूलों के सामने पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर निजी स्कूलों के लिए समय पर किताबें उपलब्ध कराने की मांग की है।
एसोसिएशन का कहना है कि पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा सरकारी स्कूलों में पुस्तकों की आपूर्ति शुरू कर दी गई है, लेकिन निजी स्कूलों के लिए अब तक कोई स्पष्ट वितरण शेड्यूल जारी नहीं किया गया है। इससे नए सत्र की शुरुआत से पहले विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है।
एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि स्कूल शिक्षा विभाग निजी स्कूलों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रहा है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों तक संकुल स्तर पर किताबें पहुंचाई जा रही हैं, जबकि निजी स्कूलों को पाठ्यपुस्तक निगम के डिपो से स्वयं पुस्तकें प्राप्त करनी पड़ेंगी।
पत्र में बताया गया है कि प्रदेश के कई निजी स्कूलों को किताबें लेने के लिए 150 से 200 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ सकती है। इससे परिवहन लागत बढ़ने के साथ-साथ समय की भी अतिरिक्त आवश्यकता होगी।
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि स्कूल खुलने से पहले सभी विद्यार्थियों तक किताबें पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इसलिए शिक्षा विभाग जल्द से जल्द निजी स्कूलों के लिए पुस्तक वितरण का शेड्यूल जारी करे और किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित करे, ताकि 16 जून से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
एसोसिएशन ने उम्मीद जताई है कि शिक्षा विभाग इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लेकर निजी स्कूलों और विद्यार्थियों को राहत प्रदान करेगा।
