रायपुर, 12 जून। CG Update : छत्तीसगढ़ सरकार ने विधायकों को सचिवालयीन और लिपिकीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब विधायक केवल अपने विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि राज्य के किसी भी जिले में पदस्थ कर्मचारियों की सेवाएं अपने कार्यालयीन कार्यों के लिए प्राप्त कर सकेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी इस संशोधन को विधायकों की लंबे समय से चली आ रही व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
सभी कलेक्टरों को जारी हुआ संशोधित आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी कलेक्टरों को पत्र जारी कर वर्ष 2019 में सांसदों और विधायकों को लिपिकीय एवं सचिवालयीन सहायता उपलब्ध कराने संबंधी आदेश में किए गए संशोधन की जानकारी दी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद विधायक अपने क्षेत्र के अलावा अन्य जिलों में पदस्थ कर्मचारियों को भी अपने कार्यालयीन कार्यों के लिए अटैच करा सकेंगे।
अब अनुभवी कर्मचारियों की सेवाएं लेना होगा आसान
सरकार के इस फैसले से उन विधायकों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र में आवश्यक प्रशासनिक सहयोग या अनुभवी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे। नई व्यवस्था के तहत वे राज्य के किसी भी जिले से उपयुक्त कर्मचारियों की सेवाएं लेकर अपने कार्यालय संचालन, जनसंपर्क और अन्य प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेंगे।
राज्य स्तरीय कार्यालयों के कर्मचारियों पर रहेगा प्रतिबंध
हालांकि सरकार ने इस नई व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है। संशोधित निर्देशों के अनुसार मंत्रालय, विभागाध्यक्ष कार्यालय तथा अन्य राज्य स्तरीय कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारियों को किसी विधायक के साथ अटैच नहीं किया जा सकेगा। यानी केवल जिला स्तर पर पदस्थ कर्मचारी ही इस व्यवस्था के तहत अटैच किए जा सकेंगे।
सांसदों के लिए पुरानी व्यवस्था रहेगी जारी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध सांसदों पर लागू नहीं होगा। सांसद पहले की तरह आवश्यकता के अनुसार कर्मचारियों की सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। उनके लिए पूर्व में लागू प्रावधान यथावत बने रहेंगे।
कार्यालय संचालन और जनसंपर्क कार्यों में मिलेगी सुविधा
कई विधायक लंबे समय से पर्याप्त लिपिकीय और सचिवालयीन सहायता नहीं मिलने की समस्या उठा रहे थे। इसके कारण उन्हें कार्यालय संचालन, जनसंपर्क कार्यक्रमों के समन्वय और विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सरकार का यह नया फैसला इन समस्याओं को दूर करने और जनप्रतिनिधियों को बेहतर प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

