रायपुर , 10 जून। Laika Ghar : ग्रामीण बच्चों को बेहतर प्रारंभिक शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित ग्राम सियादेही में विकसित ‘लइका घर’ अब पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। यह पहल बच्चों की प्रारंभिक देखभाल, पोषण, पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक शिक्षा को एक ही परिसर में उपलब्ध कराकर शिक्षा के क्षेत्र में नया मानक स्थापित कर रही है।
एक ही परिसर में पूरी होगी शिक्षा की यात्रा
सियादेही में विकसित इस एकीकृत शिक्षा मॉडल के तहत 7 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए ‘लइका घर’, 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र और 6 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए प्राथमिक विद्यालय की व्यवस्था एक ही परिसर में की गई है। इस मॉडल से बच्चों को बार-बार नया वातावरण नहीं बदलना पड़ेगा, जिससे उनकी सीखने की क्षमता और विद्यालय से जुड़ाव बेहतर होगा।
खेल-खेल में सीखने की व्यवस्था
लइका घर को पूरी तरह बाल-मित्र वातावरण में तैयार किया गया है। रंग-बिरंगी दीवारों पर हिंदी वर्णमाला, अंक, फल-सब्जियां, पशु-पक्षियों और प्रकृति से जुड़े चित्र उकेरे गए हैं। बच्चों के लिए शैक्षणिक और मनोरंजक खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे वे खेल-खेल में नई चीजें सीख सकें और उनकी रचनात्मक क्षमता विकसित हो।
ड्रॉपआउट रोकने में मिलेगी मदद
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार एक ही परिसर में शिक्षा की निरंतर व्यवस्था होने से बच्चों के स्कूल छोड़ने की संभावना कम होगी। साथ ही शत-प्रतिशत नामांकन और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
समग्र विकास पर विशेष फोकस
यह पहल केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है बल्कि बच्चों के मानसिक, सामाजिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सुरक्षित, स्वच्छ और हरित वातावरण बच्चों को बेहतर सीखने का अवसर प्रदान करेगा।
प्रदेश के लिए बन सकता है रोल मॉडल
जिला प्रशासन का मानना है कि प्रारंभिक बाल्यावस्था में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सही वातावरण बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार करता है। सियादेही का ‘लइका घर’ इसी सोच का परिणाम है, जो भविष्य में प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी मॉडल बन सकता है।
