रायपुर, 25 मई। Kharif 2026 : राज्य सरकार ने खरीफ वर्ष 2026 के लिए सहकारी क्षेत्र में उर्वरक वितरण संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों के साथ जैव उर्वरक, जैविक खाद, हरी खाद और नील-हरित काई जैसे वैकल्पिक उपायों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि खेती को अधिक टिकाऊ, किफायती और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।
अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों के मद्देनजर नई व्यवस्था लागू
राज्य शासन ने वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव को देखते हुए किसानों को समय पर और समानुपातिक मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह नई व्यवस्था लागू की है। शासन का उद्देश्य संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना, खेती की लागत कम करना, भूमि की उर्वरा शक्ति को सुरक्षित रखना और उर्वरकों की कालाबाजारी एवं गैर-कृषि उपयोग पर रोक लगाना है। साथ ही Fertilizer Control Order 1985 के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
यूरिया और डीएपी वितरण का नया पैमाना
नई व्यवस्था के तहत खरीफ 2025 में किसानों को वितरित उर्वरकों के आधार पर इस वर्ष का कोटा निर्धारित किया गया है। किसानों को पिछले वर्ष मिले यूरिया की केवल 80 प्रतिशत मात्रा पारंपरिक यूरिया के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि शेष 20 प्रतिशत उपलब्धता के आधार पर अथवा विकल्प के रूप में नैनो यूरिया के जरिए दी जाएगी। इसी प्रकार डीएपी की 60 प्रतिशत मात्रा ही पारंपरिक रूप में दी जाएगी तथा शेष 40 प्रतिशत के लिए वैकल्पिक एनपीके उर्वरक या नैनो डीएपी उपलब्ध कराया जाएगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी किसान को नैनो उर्वरक लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
जोत के आधार पर किश्तों में होगा वितरण
नई व्यवस्था के अनुसार सीमांत किसानों को निर्धारित मात्रा में उर्वरक एकमुश्त उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि लघु और बड़े किसानों को यूरिया चरणबद्ध तरीके से किश्तों में दिया जाएगा। लघु कृषकों को दो किश्तों में तथा बड़े किसानों को तीन किश्तों में उर्वरक वितरण किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक किश्त के बीच 20 दिनों का अंतराल अनिवार्य रहेगा।
पारदर्शी और समयबद्ध वितरण पर जोर
राज्य शासन ने सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों और सहकारी संस्थाओं को निर्देश दिए हैं कि उर्वरकों का वितरण पूरी तरह पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए। शासन का मानना है कि इस व्यवस्था से खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा और प्रदेश के कृषि उत्पादन में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित होगी।
