MGNREGA : छत्तीसगढ़ की पंचायतों में 7 मई को एक साथ ‘चावल महोत्सव… रोजगार दिवस’ और ‘आवास दिवस’… ग्रामीण विकास को मिलेगा नई रफ्तार

MGNREGA : छत्तीसगढ़ की पंचायतों में 7 मई को एक साथ ‘चावल महोत्सव… रोजगार दिवस’ और ‘आवास दिवस’… ग्रामीण विकास को मिलेगा नई रफ्तार

रायपुर, 07 मई। MGNREGA : छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास और जनसेवा को नई दिशा देने के लिए 07 मई को एक बड़ा राज्यव्यापी अभियान शुरू होने जा रहा है। “सुशासन तिहार 2026” के तहत प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में एक साथ चावल महोत्सव, रोजगार दिवस और आवास दिवस का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह पहल न केवल योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देगी, बल्कि जमीनी स्तर पर लंबित समस्याओं के त्वरित समाधान का भी माध्यम बनेगी।

ग्रामीण हितग्राहियों पर केंद्रित रहेगा पूरा अभियान

इस विशेष आयोजन का मुख्य फोकस ग्रामीण हितग्राहियों को सीधे लाभ पहुंचाना है। शिविरों में मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से जुड़े लंबित मामलों, शिकायतों और तकनीकी समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया जाएगा। साथ ही पात्र हितग्राहियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की जाएगी, जिससे वे अधिकतम लाभ उठा सकें।

रोजगार दिवस: मनरेगा कार्यों की समीक्षा और नए अवसर

7 मई को रोजगार दिवस के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें मनरेगा कार्यों की सघन समीक्षा की जाएगी। साथ ही आने वाले समय में ग्रामीणों के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करने की रणनीति तैयार की जाएगी।

आवास दिवस: 90 दिनों में पूर्ण होंगे लंबित मकान

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत लंबित आवासों को प्राथमिकता दी जाएगी। शासन का लक्ष्य है कि स्वीकृत आवासों को अगले 90 दिनों के भीतर पूर्ण कराया जाए, जिससे जरूरतमंद परिवारों को जल्द से जल्द पक्के घर मिल सकें।

जल संरक्षण पर भी फोकस: ‘मोर गांव-मोर पानी’ से आजीविका को बढ़ावा

अभियान के दौरान “मोर गांव–मोर पानी–मोर तरिया” पहल के तहत जल संरक्षण और आजीविका के नए साधनों पर भी चर्चा की जाएगी। “नवा तरिया आय के जरिया” थीम के माध्यम से मत्स्य पालन और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा।

तकनीक से पारदर्शिता, जनभागीदारी से सफलता

सरकार द्वारा क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे योजनाओं की जानकारी आसानी से प्राप्त हो सके और पारदर्शिता सुनिश्चित हो। इस अभियान को सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिससे यह पहल एक जनआंदोलन का रूप ले सके।

यह आयोजन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के गांवों को आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित बनाने की दिशा में एक मजबूत पहल है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।

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