रायपुर, 05 मई। Women Empowerment : पेड्रा-गौरेला-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गोरखपुर की रहने वाली श्रीमती भगवती राठौर ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल जाए तो कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। एक समय आर्थिक तंगी से जूझने वाली भगवती आज अपने दम पर बेहतर आय अर्जित कर “लखपति दीदी” बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
आर्थिक तंगी से आत्मनिर्भरता तक का सफर
भगवती राठौर का जीवन कभी सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों से घिरा हुआ था। छोटी सी जमीन पर सब्जी उगाकर वे किसी तरह परिवार का पालन-पोषण करती थीं। संसाधनों की कमी के कारण उनके लिए आगे बढ़ना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अवसर की तलाश जारी रखी।
बिहान योजना से मिला नया सहारा
उनके जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया, जब वे छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत “पायल महिला स्व-सहायता समूह” से जुड़ीं। इस समूह ने उन्हें न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की, बल्कि आधुनिक खेती, स्वरोजगार और प्रबंधन से जुड़ा प्रशिक्षण भी दिया। यहीं से उनके आत्मनिर्भर बनने की नींव मजबूत हुई।
वैज्ञानिक खेती से बढ़ी आमदनी
समूह से मिले सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर भगवती ने अपनी 1.28 एकड़ भूमि पर वैज्ञानिक पद्धति से सब्जियों और भाजी की खेती शुरू की। इसके साथ ही उन्होंने गेहूं और चना जैसी फसलों का उत्पादन भी अपनाया। उनकी मेहनत रंग लाई और आज उनकी मासिक आय 10 से 12 हजार रुपये तक पहुँच गई है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
सरकारी योजनाओं ने बदली जिंदगी
भगवती की सफलता में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का भी अहम योगदान रहा। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली मासिक सहायता ने उनकी आर्थिक जरूरतों को सहारा दिया, वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिलने से उन्हें धुएं से मुक्ति मिली और स्वास्थ्य में सुधार हुआ।
गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
आज भगवती राठौर अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। वे स्व-सहायता समूह की अन्य महिलाओं को भी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका यह सफर दिखाता है कि जब सरकारी योजनाएं सही तरीके से जमीनी स्तर तक पहुंचती हैं, तो वे लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाती हैं।
भगवती की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत उदाहरण है। यह कहानी बताती है कि संकल्प, मेहनत और सही अवसर मिलने पर हर महिला अपने जीवन को नई दिशा दे सकती है।

