रायपुर, 29 अप्रैल। Swasth Bastar : सुकमा, जो कभी अपने भौगोलिक क्षेत्र के लिए जाना जाता था, आज मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का नया उदाहरण बन रहा है। अब डॉक्टर और रेगिस्तानी जंगल तक पहुंच रहे हैं, जहां पहले बेहद मुश्किल था।
दहलीज तक रीच रही स्वास्थ्य सेवा कंपनी
इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत इसकी पहुंच है। स्वास्थ्य विभाग अब गांव-गांव मलेरिया, टीबी, कुष्ठ, बीपी, शुगर, सिकल सेल और कैंसर रोगियों की जांच कर रहा है। इससे समय पर पहचान और इलाज संभव हो रहा है।
310 किमी का संघर्ष, एक जीवन की जीत
पुतेपढ़े गांव से एक रोगी जिले को 310 किमी दूर अस्पताल पहुंचाना इस अभियान की यात्रा और उपहार का उदाहरण है। कठिन ठोस और सीमित फॉर्मूलेशन के बावजूद टीम ने मरीज के जीवन में सफलता की प्राप्ति की।
आयुष्मान योजना से जुड़ा आर्थिक संबल
आयुष्मान भारत योजना के तहत अब 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। इस गरीब परिवार को इलाज के लिए कर्ज या संपत्ति की मजबूरी से राहत मिली है।
पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा का संगम
राज्य में आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा का संतुलन भी देखने को मिल रहा है। पद्मश्री हेमचंद मांझी जैसे विशेषज्ञ के योगदान से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
जमीनी स्तर पर असर दिख रहा है
कोंटा और मैरीगुडा जैसे इलाकों में मुफ्त चश्मा वितरण, मोतियाबिंद कंसल्टेंसी और बेबी आसनसोल के लिए शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इससे पहले भी अपने क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। पोटाकॉलेज और अन्य पहाड़ी इलाकों से सामने आ रही सफलता की कहानियां यह साबित करती हैं कि जब प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्रालय साथ मिलकर काम करते हैं, तो भौगोलिक बाधाएं भी विकास की राह नहीं रोकतीं।

