रायपुर/राजनांदगांव, 13 जून। PM Surya Ghar : स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव जिला देशभर में नई पहचान बनाकर उभरा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के बल पर राजनांदगांव देश में सर्वाधिक सोलर क्षमता वाले कनेक्शन स्थापित करने वाला जिला बन गया है। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी सौर ऊर्जा को लेकर लोगों का उत्साह तेजी से बढ़ रहा है, जिससे जिले ने हरित ऊर्जा क्रांति की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
योजना के प्रति लोगों का बढ़ा भरोसा, हजारों घरों में पहुंची सौर ऊर्जा
कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन तथा जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के समन्वित प्रयासों से यह सफलता संभव हो सकी है। योजना के तहत जिले में अब तक 6776 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 6381 हितग्राहियों ने वेंडर का चयन कर लिया है। वहीं 3255 घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं और 2218 लाभार्थियों को सब्सिडी का भुगतान भी किया जा चुका है। यह आंकड़े योजना के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास और जागरूकता को दर्शाते हैं।
घरेलू से लेकर औद्योगिक स्तर तक बढ़ी सौर ऊर्जा क्षमता
राजनांदगांव जिले में स्थापित 3255 घरेलू सोलर कनेक्शनों के माध्यम से लगभग 9 मेगावाट क्षमता विकसित की गई है। इसके अलावा 162 व्यावसायिक सोलर कनेक्शनों से 3.40 मेगावाट क्षमता जुड़ी है। वहीं जिले में स्थापित 31 पावर प्लांटों के जरिए कुल 383 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित की गई है, जो जिले को देश के प्रमुख सोलर ऊर्जा केंद्रों में शामिल करती है।
160 मेगावाट का सोलर कनेक्शन बना राष्ट्रीय उपलब्धि
जिले की सबसे बड़ी उपलब्धि ढाबा स्थित मेसर्स सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड का 160 मेगावाट क्षमता वाला सोलर कनेक्शन है। इसे देश में अपनी तरह का सबसे बड़ा सोलर कनेक्शन माना जा रहा है। यह परियोजना न केवल राजनांदगांव बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय बन गई है और देश में अक्षय ऊर्जा विकास की दिशा में एक नया उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।
हरित ऊर्जा की दिशा में प्रेरक मॉडल बना राजनांदगांव
जिला प्रशासन उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हितग्राहियों को सम्मानित कर अन्य नागरिकों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। राजनांदगांव की यह उपलब्धि न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने का भी प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। हरित भविष्य की ओर बढ़ते भारत में राजनांदगांव का यह मॉडल अब अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
