रायपुर, 26मई| केंद्र सरकार द्वारा घोषित वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों में इस बार छत्तीसगढ़ का नाम खास तौर पर चमका है। बस्तर की मिट्टी से जुड़े तीन ऐसे लोगों को पद्म श्री सम्मान के लिए चुना गया है, जिन्होंने वर्षों तक बिना किसी प्रचार-प्रसार के समाज और मानव सेवा को अपना जीवन बना लिया। समाजसेवा के क्षेत्र में कार्यरत बुधरी ताती तथा स्वास्थ्य सेवा में समर्पित डॉ. रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले और सुनीता गोडबोले को देश के इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा जाएगा।
अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित इलाके में बुधरी ताती पिछले कई दशकों से आदिवासी महिलाओं और बच्चियों के उत्थान के लिए काम कर रही हैं। शिक्षा, सिलाई प्रशिक्षण और जागरूकता अभियानों के जरिए उन्होंने सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया। क्षेत्र के लोग उन्हें प्यार और सम्मान से ‘बड़ी दीदी’ कहकर बुलाते हैं।
वहीं डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले ने बस्तर के दुर्गम गांवों में स्वास्थ्य सेवा की ऐसी मिसाल पेश की है, जहां आज भी मूलभूत सुविधाएं पहुंचना चुनौती है। दोनों वर्षों से मुफ्त इलाज, स्वास्थ्य शिविर और कुपोषण के खिलाफ अभियान चलाकर हजारों ग्रामीणों के जीवन में बदलाव ला रहे हैं।
इन तीनों व्यक्तित्वों का पद्म श्री के लिए चयन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा की कहानी बन गया है।
