रायपुर, 23 अप्रैल। Economic Corridior : छत्तीसगढ में अधोसंरचना विकास को नई दिशा देने वाला रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर तेजी से आकार ले रहा है। 627 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा हिस्सा, लगभग 384 किलोमीटर, छत्तीसगढ़ से होकर गुजर रहा है, जिससे प्रदेश की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बल मिलेगा। वर्तमान में पथलगाँव से झारखंड सीमा तक 104.250 किलोमीटर लंबे खंड पर तेजी से निर्माण कार्य चल रहा है। यह हिस्सा पूरे कॉरिडोर की रीढ़ माना जा रहा है, जिसे निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
382 संरचनाओं से बनेगा बाधारहित मार्ग
इस मार्ग को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए कुल 382 छोटी-बड़ी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इनमें बड़े और छोटे पुल, फ्लाईओवर, अंडरपास और पुलियाएं शामिल हैं, जो यातायात को निर्बाध बनाएंगे और दुर्घटनाओं की संभावना को कम करेंगे।
अंतरराज्यीय संपर्क को मिलेगा बल
यह कॉरिडोर झारखंड के साथ छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। इससे व्यापारिक परिवहन तेज और सुगम होगा, जिससे उद्योगों और बाजारों के बीच दूरी कम हो जाएगी।
जशपुर के लिए बनेगा जीवन रेखा
जशपुर ज़िला के लिए यह परियोजना किसी लाइफलाइन से कम नहीं होगी। यह मार्ग पत्थलगांव, कांसाबेल, कुनकुरी, दुलदुला और जशपुर जैसे प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ते हुए विकास के नए अवसर खोलेगा। यह कॉरिडोर रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक शहरों को धनबाद से जोड़ेगा। इससे कोयला खदानों और इस्पात उद्योगों के लिए परिवहन आसान होगा, जिससे व्यापार और उत्पादन को नई गति मिलेगी। तेज और सुरक्षित सड़क नेटवर्क के कारण यात्रा समय, ईंधन खपत और परिवहन लागत में कमी आएगी। इससे न केवल उद्योगों को लाभ होगा, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी आवागमन अधिक सुविधाजनक बनेगा।
इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यवसाय के अवसर बढ़ेंगे। बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के लिए विकास का नया द्वार खोलने जा रहा है। यह परियोजना न केवल परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी, बल्कि समग्र आर्थिक प्रगति को भी गति देगी।

