Tungal Eco-tourism Center : विकास और पुनर्वास की नई मिसाल…महिलाओं के सशक्तिकरण की अनूठी पहल

Tungal Eco-tourism Center : विकास और पुनर्वास की नई मिसाल…महिलाओं के सशक्तिकरण की अनूठी पहल

रायपुर, 19 अप्रैल। Tungal Eco-tourism Center : सुकमा जिले में वन विभाग की एक सराहनीय पहल ने विकास और सामाजिक पुनर्वास की नई कहानी लिखी है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में विकसित “तुंगल इको-पर्यटन केंद्र” आज आत्मनिर्भरता और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बनकर उभरा है।

उपेक्षित स्थान से बना आकर्षक पर्यटन स्थल

सुकमा नगर से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान पहले जर्जर और उपेक्षित था, लेकिन अब इसे खूबसूरत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ बनाए गए आकर्षक टापू, हरियाली और प्राकृतिक वातावरण पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। खास बात यह है कि Odisha से भी बड़ी संख्या में लोग यहाँ घूमने आ रहे हैं।

इस केंद्र की सबसे विशेष पहल “तुंगल नेचर कैफे” है, जिसे ‘आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्वयं सहायता समूह’ की 10 महिलाएँ संचालित कर रही हैं। इनमें से 5 महिलाएँ पूर्व नक्सली हैं, जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया, जबकि अन्य 5 महिलाएँ नक्सल प्रभावित परिवारों से हैं। इन सभी महिलाओं को जगदलपुर और सुकमा के संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे आज आत्मनिर्भर बनकर सम्मानजनक जीवन जी रही हैं।

पर्यटकों की बढ़ती संख्या और आय

इस इको-पर्यटन केंद्र की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। 31 दिसंबर 2025 को शुरू हुए इस केंद्र में 30 मार्च 2026 तक कुल 8,889 पर्यटक पहुंचे। इस दौरान लगभग 2.92 लाख रुपये की आय भी अर्जित हुई। पर्यटक यहाँ स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेने के साथ-साथ तुंगल डैम में कयाकिंग, पैडल बोटिंग और बाँस राफ्टिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले रहे हैं।

बदलती तस्वीर का प्रतीक

तुंगल इको-पर्यटन केंद्र यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। यह केंद्र केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि महिलाओं के साहस, आत्मविश्वास और वन विभाग की दूरदर्शी सोच का जीवंत उदाहरण है। बस्तर क्षेत्र की बदलती तस्वीर में यह पहल एक उज्ज्वल उदाहरण बनकर सामने आई है, जो प्रकृति संरक्षण और मानव विकास को साथ लेकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संदेश देती है।

स्पेशल