Chhattisgarh Assembly : छत्तीसगढ़ विधानसभा का ऐतिहासिक पल…! 25 साल की लोकतांत्रिक यात्रा अब इतिहास बनाने को तैयार…18 नवंबर को पुरानी विधानसभा का आखिरी सत्र

Chhattisgarh Assembly : छत्तीसगढ़ विधानसभा का ऐतिहासिक पल…! 25 साल की लोकतांत्रिक यात्रा अब इतिहास बनाने को तैयार…18 नवंबर को पुरानी विधानसभा का आखिरी सत्र

रायपुर, 12 नवंबर। Chhattisgarh Assembly : छत्तीसगढ़ विधानसभा इस वर्ष एक ऐतिहासिक परिवर्तन की ओर बढ़ रही है। 18 नवंबर 2025 को रायपुर स्थित मौजूदा विधानसभा भवन में विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद अगला सत्र नवा रायपुर के नए और भव्य विधानसभा भवन में आयोजित होगा।

साल 2000 में राज्य गठन के बाद से यह भवन छत्तीसगढ़ की राजनीतिक, प्रशासनिक और लोकतांत्रिक यात्रा का साक्षी रहा है। यहीं से राज्य ने अपनी पहली नीतियां बनाईं, पहला बजट पारित किया और जनता के प्रतिनिधित्व का असली अर्थ साकार हुआ। बीते 25 वर्षों में इस भवन ने कई मुख्यमंत्रियों, विधानसभा अध्यक्षों, विपक्ष के नेताओं और सैकड़ों विधायकों को आते-जाते देखा है। अब यह भवन स्वयं इतिहास का हिस्सा बनने जा रहा है।

पूर्व प्रमुख सचिव ने साझा की यादें

छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव चंद्रशेखर गंगराड़े ने एक निजी चेनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि, वर्ष 2001 में उनकी सेवा विधानसभा में स्थानांतरित हुई थी और वे 31 मार्च 2022 तक यहां कार्यरत रहे। उन्होंने लगभग 22 वर्षों तक विधानसभा की कार्यप्रणाली को करीब से देखा और प्रथम से पंचम विधानसभा तक सेवा का अवसर प्राप्त किया।

इस विदाई सत्र के साथ पुराना विधानसभा भवन छत्तीसगढ़ की लोकतांत्रिक यात्रा के स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा, जबकि नवा रायपुर का नया भवन राज्य की नई राजनीतिक शुरुआत का प्रतीक बनेगा।

अस्थायी हॉल से शुरुआत

राज्य गठन के बाद 14 दिसंबर 2000 को पहला सत्र राजकुमार कॉलेज रायपुर के जशपुर हॉल में हुआ था। यह अस्थायी सत्र राज्य की विधायी यात्रा की औपचारिक शुरुआत था।

पहले सत्र के बाद स्थायी भवन की जरूरत महसूस हुई। उस समय जो भवन ‘राजीव गांधी जलग्रहण मिशन’ का कार्यालय था, उसे विधानसभा के लिए चुना गया और विधानभवन के अनुरूप परिवर्तित किया गया।

27 फरवरी 2001 को हुआ पहला सत्र

वर्तमान विधानसभा भवन में 27 फरवरी 2001 को पहला सत्र हुआ, जो राज्य का दूसरा सत्र था। धीरे-धीरे यह भवन एक पूर्ण और आधुनिक विधानभवन में तब्दील हुआ।

यह भवन शहर से दूर होने के कारण यहां चिकित्सालय, रेलवे आरक्षण केंद्र, पोस्ट ऑफिस, दर्शक दीर्घा और अन्य सुविधाएं विकसित की गईं। महात्मा गांधी की प्रतिमा और ‘सत्यमेव जयते’ का राष्ट्रीय प्रतीक भी लगाया गया।

पहला बजट सत्र

यहीं से छत्तीसगढ़ का पहला बजट (2001-2002) पेश किया गया। इसके बाद हर महत्वपूर्ण नीति, बजट और चर्चा इसी भवन में संपन्न हुई।

राज्य गठन के शुरुआती दिनों में विधानसभा सचिवालय डीकेएस हॉस्पिटल के दो कमरों से संचालित होता था। गंगराड़े ने कहा, दो कमरों से शुरू हुई यात्रा आज नवा रायपुर के विशाल विधानभवन तक पहुंची है।

कोरोना काल की चुनौती

महामारी के दौरान सामाजिक दूरी के नियमों को ध्यान में रखकर सीटों में बदलाव किया गया और ग्लास पार्टीशन लगाए गए। इसके बावजूद विधानसभा की कार्यवाही कभी नहीं रुकी।

विधानसभा ने पेपरलेस प्रणाली की दिशा में कदम बढ़ाया। अब सदस्य अपने प्रश्न ऑनलाइन भेजते थे और विभाग डिजिटल उत्तर देते थे।

गर्भगृह प्रवेश निषेध नियम

विधानसभा ने 2001 में एक अनूठा नियम लागू किया, यदि कोई सदस्य गर्भगृह में प्रवेश करता है, तो स्वतः निलंबित माना जाएगा। यह परंपरा आज भी जारी है।

तीन राष्ट्रपतियों का आगमन

इस विधानसभा में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, प्रतिभा देवी सिंह पाटिल और द्रौपदी मुर्मू जैसे राष्ट्रपतियों ने सदन को संबोधित किया, यह राज्य के लिए गौरव का क्षण रहा। गंगराड़े ने कहा, छत्तीसगढ़ की राजनीति लोकतांत्रिक परंपराओं की मिसाल है। अजीत जोगी से लेकर विष्णुदेव साय और डॉ. रमन सिंह तक, सभी ने इस सदन की गरिमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

अब इतिहास बनेगा यह भवन

रायपुर का यह पुराना विधानभवन अब इतिहास का हिस्सा बनने जा रहा है। इसने छत्तीसगढ़ की 25 साल की लोकतांत्रिक यात्रा को जिया और जनता की आवाज को विधान में रूपांतरित करने का कार्य किया। नवा रायपुर का नया विधानसभा भवन अब छत्तीसगढ़ की नई सियासी और लोकतांत्रिक पहचान बनेगा।

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