Bank Sakhi Baleshwari : गांव-गांव पहुंचाकर बदल रहीं हैं जीवन, 11 करोड़ के लेन-देन से मिली नई पहचान, किंग सेवाओं से आर्थिक सशक्तिकरण और समाज में सम्मान दोनों पा रहीं हैं सरगुजा की ‘बैंक वाली दीदी’

Bank Sakhi Baleshwari : गांव-गांव पहुंचाकर बदल रहीं हैं जीवन, 11 करोड़ के लेन-देन से मिली नई पहचान, किंग सेवाओं से आर्थिक सशक्तिकरण और समाज में सम्मान दोनों पा रहीं हैं सरगुजा की ‘बैंक वाली दीदी’

रायपुर, 09 अक्टूबर। Bank Sakhi Baleshwari : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत लोसंगी की बालेश्वरी यादव आज ग्रामीणों के बीच एक जाना-पहचाना नाम बन चुकी हैं। उन्हें सभी प्यार से ‘बैंक वाली दीदी’ कहते हैं। बैंक सखी के रूप में काम कर रहीं बालेश्वरी, गांव-गांव जाकर न सिर्फ बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होकर समाज में अपनी एक अलग पहचान भी बना चुकी हैं।

गांव में अब बैंक आता है – और वो हैं ‘बालेश्वरी दीदी’

बालेश्वरी यादव वर्तमान में लोसंगी, लोसगा, रेमहला, लब्जी और कटिन्दा ग्राम पंचायतों में घर-घर जाकर वृद्धा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, मनरेगा मजदूरी भुगतान, जनधन खाता संचालन, बीमा योजनाएं आदि से जुड़े बैंकिंग कार्य करती हैं। अब तक वे करीब 11 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन कर चुकी हैं, जो बताता है कि कैसे एक ग्रामीण महिला ने बैंकिंग क्षेत्र में विश्वास का एक मजबूत पुल बनाया है।

बालेश्वरी का यह सफर वर्ष 2014 में शुरू हुआ, जब उनके गांव में रानी लक्ष्मीबाई स्व-सहायता समूह का गठन हुआ। वे इस समूह की अध्यक्ष बनीं और बाद में ग्राम संगठन व क्लस्टर संगठन में भी नेतृत्व किया। सक्रिय महिला व बुक कीपर के रूप में काम करने के बाद उन्हें NRLM (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के माध्यम से बैंक सखी बनने का अवसर मिला। आरसेटी (RSETI) से उन्हें बैंक सखी का प्रशिक्षण दिया गया और वर्ष 2021 से वे यह कार्य निरंतर कर रही हैं।

प्रत्येक माह 15,000 रुपये तक की आय

बालेश्वरी बताती हैं कि पहले वे मजदूरी कर परिवार चलाती थीं। लेकिन बैंक सखी बनने के बाद उनकी मासिक आय लगभग 15 हजार रुपये हो गई है। इसके साथ ही उन्हें समाज में सम्मान और पहचान भी मिली है।

वे बताती हैं, “लोगों की मदद करने से जो संतोष और खुशी मिलती है, वो मेरे लिए सबसे बड़ी कमाई है। जरूरतमंद जब मुझे बुलाते हैं, तो मैं खुद उनके घर जाकर सेवा देती हूं।”

सुविधाएं जो बालेश्वरी ने दीं

अब तक 513 जनधन खाते खोले, 713 लोगों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जोड़ा, 556 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से जोड़ा, 600 से अधिक लोग अटल पेंशन योजना से जुड़े। बालेश्वरी जैसी महिलाएं दिखाती हैं कि जब ग्रामीण महिलाएं अवसर और प्रशिक्षण पाती हैं, तो वे गांवों में क्रांति ला सकती हैं। बैंक सखी न केवल बैंकिंग सेवाएं पहुंचाती हैं, बल्कि वित्तीय साक्षरता, सुरक्षा और भरोसे का वातावरण भी बनाती हैं सरगुजा की ‘बैंक वाली दीदी’ आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी हैं – उनकी कहानी प्रेरणा है हर उस महिला के लिए जो आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती है।

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