National Herald Case
नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़ा मोड़ तब आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा और अन्य के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। यह पहली बार है जब सोनिया और राहुल गांधी जैसे बड़े नेताओं के खिलाफ किसी मामले में आधिकारिक रूप से आरोपपत्र पेश किया गया है। चार्जशीट दाखिल होने के कुछ ही घंटे पहले राहुल गांधी के बहनोई, रॉबर्ट वाड्रा से भी एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूछताछ की गई थी, जिससे राजनीतिक माहौल और भी गरमा गया।
चार्जशीट के अनुसार, यह मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और यंग इंडिया नाम की कंपनियों से जुड़ा है, जहां कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग के ज़रिए करोड़ों रुपये की संपत्तियाँ गलत तरीके से हासिल की गईं। ED का दावा है कि दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में की गई कार्रवाई में कुल मिलाकर 751.9 करोड़ रुपये की संपत्तियाँ जब्त की गई हैं। ये सभी संपत्तियाँ कथित तौर पर अवैध ढंग से अर्जित की गई आय से जुड़ी हैं।
National Herald Case
इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस का गुस्सा फूट पड़ा। पार्टी ने इस पूरे मामले को “राजनीतिक प्रतिशोध” बताया और कहा कि यह मोदी सरकार की सोची-समझी रणनीति है, जिससे वह अपने राजनीतिक विरोधियों को डराना चाहती है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह कानून की प्रक्रिया नहीं बल्कि “कानून के नाम पर किया जा रहा एक राज्य प्रायोजित अपराध” है। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया।
इसके विरोध में कांग्रेस ने 16 अप्रैल यानि की आज देशभर में प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी के निर्देशानुसार, सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियाँ ED के दफ्तरों और जिला स्तर पर केंद्र सरकार के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करेंगी। इसमें वरिष्ठ नेता, सांसद, विधायक और पार्टी कार्यकर्ता भाग लेंगे और सरकार की कार्रवाई के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे।
National Herald Case
वहीं, भाजपा ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि ED एक स्वतंत्र संस्था है और वह अपने कानून के तहत काम कर रही है। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि कानून सबके लिए समान है — चाहे वह आम नागरिक हो या कोई बड़ा नेता। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी को केवल इसलिए नहीं बख्शा जा सकता क्योंकि वह किसी प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आता है।
बता दें कि यह मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक तूफान में तब्दील हो गया है। कांग्रेस इसे जहां लोकतंत्र पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा मान रही है। इस बीच, कोर्ट ने इस मामले में आरोपों पर संज्ञान लेने के लिए 25 अप्रैल की तारीख तय की है, और अब सबकी निगाहें उस सुनवाई पर टिकी हैं।

