रायपुर. छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के नाम पर स्टेट नोडल एजेंसी की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है, योजना के तहत 61 अस्पतालों को 129 करोड़ रुपए के भुगतान पर जांच एजेंसी ने सवाल खड़े किए हैं, जांच समिति की रिपोर्ट आने से पहले स्टेट नोडल एजेंसी हॉस्पिटल को-ऑर्डिनेटर प्रियंका लालवानी को क्लेम भुगतान वाली जिम्मेदारी से हटा दिया गया है, हालांकि अब तक उन पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है, हॉस्पिटल को-ऑर्डिनेटर प्रियंका पर आरोप है कि उन्होंने 61 अस्पतालों को 129 करोड़ का क्लेम कर दिया.
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एख मीडिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पूरे कारनामे में अपने पति डॉ. विवेक लालवानी के अस्पताल को भी फायदा पहुंचाया है, इतना ही नहीं उनके अस्पताल के डॉक्टर को क्लेम चेक करने के लिए बुलाया है, विशेषज्ञ डॉक्टरों से क्लेम वेरीफाई कराने की बजाए मेडिकल कॉलेज से पास जूनियर डॉक्टरों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से 39 फ्रेशर डॉक्टरों को बुलाकर वेरीफाई कराया, अपने पति और सिंडिकेट में शामिल अस्पतालों के सौ फीसदी क्लेम कुछ ही दिनों में अप्रूव कर दिए गए है, जबकि कई अस्पतालों के क्लेम को रिजेक्ट कर दिया गया.

जांच समिति की भूमिका भी संदेह के घेरे में
मामला सामने आया तो पूरे जांच के लिए अगस्त में तीन सदस्यों की समिति बनाई गई, इसमें एसएनए के तत्कालीन नोडल, नर्सिंग होम एक्ट की नोडल एजेंसी के सहायक संचालक और एक आईटी विशेषज्ञ को रखा गया, समिति को संदिग्ध भुगतान और इसके दोषी अफसरों की जांच करना था, सात दिन में रिपोर्ट देनी थी, पूरी जांच दो स्तरों पर होनी थी, इसमें पहले आयुष्मान सॉफ्ट वेयर से जुड़े दस्तावेजों की जांच होनी थी, वहीं दूसरे स्तर पर फिजिकल वैरीफिकेशन किया जाना था लेकिन करीब दो महीने तक रिपोर्ट पेश नहीं हुई, उसके बाद आचार संहिता लग गई, जिसके बाद मामला टलता चला गया, नई सरकार ने भी इसमें देरी की, लेकिन जिम्मेदारों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, सिर्फ हॉस्पिटल को-ऑर्डिनेटर को उनके काम से हटा दिया गया, इस वजह से समिति की भूमिका भी संदेह के घेरे में है.
अस्पतालों से की जाएगी रिकवरी
स्वास्थ्य संचालक ऋतुराज रघुवंशी ही स्टेट नोडल अधिकारी हैं, उन्हें भी जांच रिपोर्ट मिल गई है, जो जल्द ही शासन को दी जाएगी, विभागीय अफसरों से मिली जानकारी के अनुसार कमेटी की जांच में जिन 61 अस्पतालों को क्लेम वेरीफाई करने के बाद पेमेंट भुगतान किया गया है, उनसे रिकवरी की जाएगी, सभी अस्पतालों की गड़बड़ियों का पूरा ब्यौरा बनाया गया है, गलत तरीके से क्लेम राशि लेने वाले अस्पतालों के आगे के क्लेम का भुगतान नहीं किया जाएगा, उन्हें जो गलत तरीके से भुगतान किया गया है, उसे ही एडजस्ट किया जाएगा, वहीं जिन अस्पतालों का क्लेम जानबूझकर रिजेक्ट किया गया था, उन्हें फिर से वेरीफाई कर क्लेम दिया जाएगा, इस पूरे मामले में केंद्रीय नोडल एजेंसी भी जांच कर रही है.
16 महीने में 1339 करोड़ का क्लेम, इसमें 1002 करोड़ का क्लेम सेटल्ड, 129 करोड़ संदिग्ध
रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2022 से जुलाई 2023 तक 16 महीने में 5 लाख 90 हजार क्लेम किए गए, क्लेम के तहत दावा की गई कुल राशि 1339 करोड़ रुपए थी, जिनमें 4 लाख 67 हजार क्लेम अप्रूव किए गए, अप्रूव क्लेम में 1002 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया, इस पूरे क्लेम में संदिग्ध क्लेम की बात करें तो 16 महीनों में 47372 क्लेम किए गए, जिनमें 129 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया, ये क्लेम 61 अस्पतालों को किए गए हैं, सबसे हैरानी की बात यह है कि डेढ़ महीने में क्लेम वेरीफाई कर दिया गया, दिखावे के लिए कुछ अस्पतालों में मामूली कटौती कर दी, स्टेट नोडल एजेंसी ने जितने क्लेम का निपटारा किया उनमें ऐसे अस्पताल भी हैं जहां सुविधाएं तक नहीं थी.
