Kharif 2026 की तैयारी पूरी, धान और हरी खाद के बीजों का रिकॉर्ड भंडारण… किसानों को मिलेगा समय पर लाभ… पिछले साल से अधिक बीज उपलब्ध

Kharif 2026 की तैयारी पूरी, धान और हरी खाद के बीजों का रिकॉर्ड भंडारण… किसानों को मिलेगा समय पर लाभ… पिछले साल से अधिक बीज उपलब्ध

रायपुर, 13 जून । Kharif 2026 के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए धान और हरी खाद के बीजों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित कर लिया है। कृषि विभाग द्वारा राज्य की सभी सहकारी समितियों में उन्नत और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि किसानों को बुवाई के समय किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। भारत सरकार और राज्य सरकार के निर्देशों के अनुरूप किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज समय पर पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रक्रिया केंद्रों से लगातार बीजों की आपूर्ति की जा रही है।

पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा बीजों का भंडारण

कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष किसानों के लिए बीजों की उपलब्धता पिछले साल की तुलना में अधिक सुनिश्चित की गई है। खरीफ 2025 में जहां इसी अवधि तक 3.73 लाख क्विंटल बीजों का भंडारण किया गया था, वहीं खरीफ 2026 के लिए अब तक 3.84 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का भंडारण किया जा चुका है। इसके अलावा सहकारी समितियों के साथ-साथ बीज प्रक्रिया केंद्रों में भी अतिरिक्त बफर स्टॉक रखा गया है, जिससे जरूरत पड़ने पर किसान सीधे वहां से भी बीज प्राप्त कर सकेंगे।

खरीफ 2026: धान और हरी खाद के बीजों का पर्याप्त भंडारण, किसानों को समय पर मिलेगा लाभ

हरी खाद पर विशेष जोर, मिट्टी की सेहत सुधारने की पहल

इस बार कृषि विभाग ने केवल धान के उन्नत बीजों की उपलब्धता पर ही नहीं, बल्कि खेतों की उर्वरता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया है। इसी उद्देश्य से सहकारी समितियों में 5,945 क्विंटल ढेंचा और 5,946 क्विंटल मूंग के बीजों का भंडारण किया गया है। किसानों ने इन बीजों का उठाव भी शुरू कर दिया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि हरी खाद का उपयोग मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बढ़ाने का सबसे किफायती और प्रभावी तरीका है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता और लागत दोनों कम होती हैं।

कम खर्च में बढ़ेगी पैदावार, घटेगा रासायनिक खाद का उपयोग

हरी खाद के रूप में ढेंचा और मूंग का उपयोग खेतों में जैविक पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाता है। इससे मिट्टी की संरचना बेहतर होती है और यूरिया व डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है। कृषि विभाग का मानना है कि यदि किसान बड़े पैमाने पर हरी खाद का उपयोग करते हैं तो इससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादन क्षमता में भी सुधार होगा।

जानिए हरी खाद उपयोग करने का सही तरीका

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हरी खाद का पूरा लाभ लेने के लिए सबसे पहले खेतों में ढेंचा या मूंग के बीजों की बुवाई करनी चाहिए। इसके बाद फसल को लगभग 45 से 60 दिनों तक बढ़ने दिया जाता है। फूल आने से पहले इस फसल को ट्रैक्टर या हल की सहायता से मिट्टी में पलटकर मिला दिया जाता है और हल्की सिंचाई की जाती है। लगभग दो से तीन सप्ताह बाद जब यह हरी खाद पूरी तरह गलकर मिट्टी में मिल जाती है, तब धान, मक्का, गेहूं या गन्ना जैसी मुख्य फसलों की बुवाई की जाती है। इससे मिट्टी को भरपूर जैविक पोषण मिलता है और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है।

किसानों को समय पर लाभ पहुंचाने पर विभाग का फोकस

कृषि विभाग द्वारा बीज वितरण व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसानों को खेती के महत्वपूर्ण समय में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। सरकार का उद्देश्य है कि हर किसान को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हो और खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके। बीजों के पर्याप्त भंडारण और हरी खाद को बढ़ावा देने की यह पहल कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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