रायपुर, 05 जून। World Environment Day : भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) आधुनिक सड़क निर्माण के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए फ्लाई-ऐश और अन्य औद्योगिक अपशिष्टों के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है। छत्तीसगढ़ सहित देशभर में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई-ऐश का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 2.17 करोड़ मीट्रिक टन तथा वर्ष 2025-26 में 62 लाख मीट्रिक टन से अधिक फ्लाई-ऐश का उपयोग सड़क निर्माण में किया गया। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी लगभग 20 लाख मीट्रिक टन फ्लाई-ऐश का उपयोग किया जा चुका है।

स्लैग, रबर और बायो-बिटुमेन का बढ़ रहा उपयोग
एनएचएआई सड़क निर्माण में स्टील उद्योग के अपशिष्ट (स्लैग), अनुपयोगी टायरों के रबर और बायो-बिटुमेन जैसी वैकल्पिक सामग्रियों का भी उपयोग कर रहा है। वर्ष 2024-25 में 30,477 मीट्रिक टन और वर्ष 2025-26 में 2,691 मीट्रिक टन रिसाइकिल्ड सामग्री का उपयोग किया गया। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होने के साथ-साथ औद्योगिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
जल संरक्षण और भूजल संवर्धन पर विशेष फोकस
राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में जल संरक्षण को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। देशभर में 13 अमृत सरोवरों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया है। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स की संख्या 14 से बढ़ाकर 105 की गई है। वहीं निर्माण कार्यों और पौधों की सिंचाई में 323 किलोलीटर शोधित जल (STP Water) का उपयोग कर जल संसाधनों के संरक्षण का उदाहरण प्रस्तुत किया गया है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए विकसित हो रहा इको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर
छत्तीसगढ़ के सीतानदी-उदंती अभ्यारण्य क्षेत्र में लगभग 3 किलोमीटर लंबी अत्याधुनिक सुरंग का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ साउंड बैरियर, मंकी कैनोपी, एलिफेंट पास और एनिमल अंडरपास जैसी संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन और आवास पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। यह परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है।
बी-कॉरिडोर और मेडिसीन पार्क से बढ़ेगी हरित समृद्धि
एनएचएआई द्वारा सड़कों के किनारे बी-कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे मधुमक्खियों के प्राकृतिक परागण को बढ़ावा मिलेगा और कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी। साथ ही मेडिसीन पार्क के माध्यम से नीम, तुलसी, एलोवेरा और आंवला जैसे औषधीय पौधों का रोपण किया जा रहा है। “एक पेड़ माँ के नाम 2.0” अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ढाई लाख से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।

पर्यावरण संरक्षण और विकास का संतुलित मॉडल
फ्लाई-ऐश की रिसाइक्लिंग, वैकल्पिक निर्माण सामग्री का उपयोग, जल संरक्षण, वन्यजीव-अनुकूल संरचनाएं और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण जैसे प्रयास एनएचएआई के सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल को नई पहचान दे रहे हैं। यह पहल विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलित दृष्टिकोण का प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करती है।
