Jal Jeevan Mission का कमाल… लरघाडंडी में हर घर पहुंचा पानी… बदली ग्रामीणों की जिंदगी… अब हर घर तक पहुंच रहा स्वच्छ पेयजल

Jal Jeevan Mission का कमाल… लरघाडंडी में हर घर पहुंचा पानी… बदली ग्रामीणों की जिंदगी… अब हर घर तक पहुंच रहा स्वच्छ पेयजल

रायपुर, 02 जून। Jal Jeevan Mission : मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के विकासखंड भरतपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत दूधांसी के आश्रित ग्राम लरघाडंडी में जल जीवन मिशन ने ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। कभी पेयजल संकट से जूझने वाला यह गांव आज नियमित जलापूर्ति, जल संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है।

पानी के लिए करना पड़ता था लंबा संघर्ष

एक समय ऐसा था जब गांव के लोगों को पेयजल के लिए हैंडपंप, कुओं और नदी पर निर्भर रहना पड़ता था। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। इससे समय और श्रम दोनों की भारी खपत होती थी तथा दैनिक जीवन प्रभावित होता था।

जल जीवन मिशन से बदली तस्वीर

जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद गांव की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा विकसित जल स्रोत, 10 हजार लीटर क्षमता की पानी टंकी और मोटर पंप आधारित जलापूर्ति प्रणाली के माध्यम से ग्रामीणों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।

गांव में बिछाई गई पाइपलाइन के जरिए अब प्रत्येक घर तक पानी पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है और उनकी दैनिक दिनचर्या पहले की अपेक्षा अधिक सुगम हो गई है।

ग्राम समिति की सक्रिय भूमिका बनी सफलता की कुंजी

ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की सक्रिय भागीदारी और ग्रामीणों के सहयोग ने इस पहल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गांव में जल संरक्षण, स्वच्छता और साफ-सफाई के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है तथा जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास किए जा रहे हैं।

जल प्रबंधन का प्रेरक उदाहरण बना गांव

आज लरघाडंडी केवल हर घर जल सुविधा वाला गांव नहीं है, बल्कि प्रभावी जल प्रबंधन और सामुदायिक सहयोग के माध्यम से ग्रामीण विकास का एक प्रेरक मॉडल बन चुका है। यहां की सफलता यह दर्शाती है कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से गांवों में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

ग्रामीणों को मिला सम्मानजनक जीवन

नियमित जलापूर्ति से ग्रामीणों का समय बच रहा है, महिलाओं का श्रम कम हुआ है और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों में भी कमी आई है। इससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है और वे विकास की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जुड़ रहे हैं।

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