छत्तीसगढ़, 26मई| छत्तीसगढ़ के चर्चित कथित शराब घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड IAS अधिकारी और पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को जमानत दे दी है। अदालत ने यह राहत इस आधार पर दी कि मामले के कई सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं और ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है।
कोर्ट ने लगाईं सख्त शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए निर्देश दिया है कि निरंजन दास छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवेश नहीं करेंगे, सिवाय जांच एजेंसियों के समन या अदालत में पेशी के लिए। इसके अलावा उन्हें जांच प्रक्रिया में सहयोग करने और शर्तों का पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
30 करोड़ रुपये कमीशन का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW की जांच के अनुसार निरंजन दास पर आरोप है कि उन्होंने आबकारी विभाग में पोस्टिंग, शराब ब्रांड की सप्लाई और जिलों में वितरण व्यवस्था तय करने में अहम भूमिका निभाई। जांच एजेंसियों का दावा है कि उन्होंने कथित रूप से करीब 30 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन प्राप्त किया।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने आईएएस अधिकारी ए.पी. त्रिपाठी के साथ मिलकर कथित सिंडिकेट के संचालन में भूमिका निभाई।
कई बड़े अधिकारी और नेता पहले से जमानत पर
इस मामले में पहले ही कई वरिष्ठ अधिकारी और नेता जमानत पर बाहर हैं, जिनमें अनिल टुटेजा, रानू साहू, समीर विश्नोई, राज्य सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया, पूर्व मंत्री कवासी लखमा और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी शामिल हैं।
इन सभी पर आरोप है कि वे कथित शराब घोटाले से जुड़े सिंडिकेट का हिस्सा रहे और सभी को अलग-अलग अदालतों से जमानत मिली है। अधिकतर मामलों में ट्रायल अभी भी जारी है।
3200 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा
ED और EOW का दावा है कि छत्तीसगढ़ में लगभग 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले को अंजाम दिया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क के जरिए डिस्टलरी से कमीशन वसूला गया, नकली होलोग्राम का इस्तेमाल हुआ और सरकारी शराब दुकानों में अवैध सप्लाई सिस्टम चलाया गया।
