अफ्रीका, 22मई| इबोला वायरस को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। यह वायरस, जिसे दुनिया के सबसे घातक संक्रमणों में से एक माना जाता है, कई बार 80 से 90 प्रतिशत तक मृत्यु दर तक पहुंच सकता है। कोविड-19 की तुलना में भी इसे कहीं अधिक घातक माना जाता है।
क्या है इबोला वायरस
Ebola virus disease एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ या संक्रमित जानवरों के संपर्क से फैलता है। यह बीमारी 1976 में पहली बार कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में सामने आई थी और तब से यह मुख्य रूप से उप-सहारा अफ्रीका में समय-समय पर फैलती रही है।
संक्रमण के गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव भी हो सकता है, जो कई बार जानलेवा साबित होता है।
वैक्सीन होने के बाद भी खतरा क्यों
हालांकि इबोला के लिए कुछ वैक्सीन उपलब्ध हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
महामारी विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला वायरस के कई अलग-अलग स्ट्रेन (variants) होते हैं। उपलब्ध वैक्सीन कुछ खास स्ट्रेन्स पर ही प्रभावी हैं, लेकिन हर स्ट्रेन पर नहीं। उदाहरण के तौर पर Bundibugyo स्ट्रेन को अधिक खतरनाक माना जाता है और इसके खिलाफ सीमित या अप्रूव्ड सुरक्षा विकल्प मौजूद हैं।
दूसरी बड़ी चुनौती
एक और बड़ी समस्या अफ्रीका के दूरदराज क्षेत्रों में कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था है। वहां समय पर वैक्सीन, जांच और इलाज पहुंचाना मुश्किल होता है। इसी वजह से संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा बना रहता है।
इबोला वायरस के लक्षण क्या होते हैं
तेज बुखार
थकान
उल्टी
बदन दर्द
ब्लीडिंग
बचाव कैसे करें
जिन इलाकों में इस वायरस के केस आ रहे हैं वहां न जाएं
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में न आएं
