रायपुर, 15 मई। Miyawaki Forest : छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए मियावकी वन तकनीक को तेजी से अपनाया जा रहा है। जापानी वनस्पतिशास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित यह तकनीक कम समय में घने और आत्मनिर्भर जंगल तैयार करने के लिए दुनिया भर में लोकप्रिय मानी जाती है। इस पद्धति के माध्यम से राज्य में शहरी, औद्योगिक और खनन प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया जा रहा है।
मियावकी तकनीक से तेजी से बढ़ते रहे घने वन
मियावकी पद्धति में स्थानीय पुरातत्वविदों का घनत्व अधिक होता है, जिससे 3 से 5 वर्षों में घना जंगल विकसित हो जाते हैं। यह तकनीक पारंपरिक पैटर्न की तुलना में 10 गुना तेजी से बढ़ती है और 30 गुना अधिक घने वन तैयार करने में सक्षम मानी जाती है। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 में लगातार इस तकनीक के माध्यम से नामांकन जारी है। कोटा, गेवरा, रायगढ़ और बारनवापारा सहित कई जिलों में हजारों औषधियां प्रचलित हैं।
राज्यभर में चल रहे बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान
वर्ष 2022 में कोटा क्षेत्र में एनटीपीसी लिमिटेड के सहयोग से हजारों कंपनियों का निजीकरण किया गया। इसके बाद वर्ष 2023 और 2024 में कोटा, गेवरा और रायगढ़ जिलों में बड़े पैमाने पर वनीकरण का काम किया गया।
वर्तमान बारानवापारा क्षेत्र में ‘हरियर छत्तीसगढ़’ योजना के तहत वायररोपण जारी है, वहीं कोरबा और रायगढ़ क्षेत्र में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड और ग्रेटडी कोलफील्ड लिमिटेड के स्तर से हरित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सहयोग विकसित किया जा रहा है।
गेवरा सॉसेज क्षेत्र बना प्रेरणादायक उदाहरण
कोरबा जिले के गेवरा क्षेत्र में 12.45 हेक्टेयर ज्वालामुखीय भूमि पर लगभग 33 हजार से अधिक मिश्रित सूक्ष्मजीवों के उपकरण लगाए गए हैं। कोयला खनन के बाद अनुपजौ होल्ड लैंड को वैज्ञानिक वैज्ञानिकों की मदद से फिर से हरियाली में बदला जा रहा है।
इस परियोजना में नीम, शीशम, करंज, महोगनी, जिंक, बांस और बेल जैसी कई पशु-पौधों के पौधे लगाए गए हैं, जिससे आने वाले समय में इस क्षेत्र में जैव विविधता से भरपूर हरित वन के रूप में विकास होगा।
पर्यावरण संरक्षण में मिल रहे बड़ा फायदा
विशेषज्ञ के अनुसार मियावकी वन अधिक कार्बन डाइऑक्साइड कण बनाते हैं और वायु तथा ध्वनि प्रदूषण कम करने में प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं। साथ ही यह भू-जल स्तर की उपलब्धता और संरक्षण में भी सहायक सिद्ध हो रहे हैं। वन मंत्री केदार कश्यप ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम बताया है।
हरित भविष्य की ओर मजबूत पहल
छत्तीसगढ़ में मियावकी प्रौद्योगिकी के माध्यम से विकसित हो रहे ये वन आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता विविधता और जलवायु संतुलन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी और उद्यम से बंजर भूमि को हरियाली में बदलने की यह पहल राज्य के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है।
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