रायपुर, 15 मई। Manpower Supply Scam : अनवर ढेबर को मैनपावर सप्लाई घोटाले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने आर्थिक अपराध को गंभीर बताते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। छत्तीसगढ़ के हाई-प्रोफाइल मैनपावर सप्लाई घोटाले में आरोपी अनवर ढेबर को एक बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उनकी ज़मानत याचिका खारिज कर दी है।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आर्थिक अपराध सामान्य अपराध नहीं होते, बल्कि यह समाज और देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली सुनियोजित साजिश का हिस्सा होते हैं।
CSMCL में ओवरटाइम भुगतान घोटाले का मामला
पूरा मामलाछत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) में कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान और मैनपावर सप्लाई से जुड़े कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के मुताबिक मैनपावर सप्लाई एजेंसियों के बिलों में भारी अनियमितताएं की गईं और भुगतान के एवज में कथित तौर पर कमीशन वसूला जाता था।
ED और ACB की जांच में बड़े खुलासे
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में 28.80 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे। इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। जांच में आरोप लगाया गया कि अनवर ढेबर ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए CSMCL के प्रशासनिक और वित्तीय फैसलों में हस्तक्षेप किया।
कमीशन दिए बिना पास नहीं होते थे बिल
जांच रिपोर्ट के अनुसार निजी एजेंसियों के बिल तब तक पास नहीं किए जाते थे, जब तक तय रकम कमीशन के तौर पर नहीं दी जाती थी। एजेंसियों का दावा है कि शुरुआत में तय दर पर कमीशन लिया जाता था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर बिल राशि का एक-तिहाई या उससे अधिक कर दिया गया। चुनावी खर्च के नाम पर कथित अवैध वसूली बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए थे।
कोर्ट ने कही सख्त बात
जमानत याचिका में अनवर ढेबर की ओर से राजनीतिक द्वेष का आरोप लगाया गया था। हालांकि राज्य सरकार ने इसे गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए जमानत का विरोध किया। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर राहत नहीं दी जा सकती कि आरोपी प्रभावशाली है या रकम सीधे उसके पास से बरामद नहीं हुई है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जब मामला जनता के पैसे और सरकारी खजाने से जुड़ा हो, तब न्यायालय को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है।
मुख्य साजिशकर्ता और लाभार्थी
हाईकोर्ट ने प्रारंभिक जांच में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अनवर ढेबर को इस कथित घोटाले का प्रमुख साजिशकर्ता और लाभार्थी मानते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।