रायपुर, 13 मई। Champaranya :राजिम के समीप स्थित चंपारण्य धाम छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह पावन स्थल महान वैष्णव संत महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली के रूप में देशभर में प्रसिद्ध है। हर साल हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
शमी वृक्ष के नीचे हुआ था दिव्य जन्म
मान्यता के अनुसार महाप्रभु वल्लभाचार्य के माता-पिता दक्षिण भारत से काशी यात्रा के दौरान वर्तमान चंपारण्य क्षेत्र पहुंचे थे। इसी स्थान पर शमी वृक्ष के नीचे उनका जन्म हुआ। धार्मिक कथाओं के अनुसार जन्म के समय बालक दिव्य तेज से घिरा हुआ दिखाई दिया, जिसके बाद उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप माना गया।
पुष्टिमार्ग की स्थापना से मिली नई भक्ति धारा
महाप्रभु वल्लभाचार्य ने वैष्णव संप्रदाय में “पुष्टिमार्ग” की स्थापना की। उनके उपदेश प्रेम, सेवा, समर्पण और श्रीकृष्ण भक्ति पर आधारित रहे। गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के वैष्णव श्रद्धालुओं के लिए चंपारण्य धाम विशेष आस्था का केंद्र है।
मंदिर परिसर में भक्ति और इतिहास का संगम
चंपारण्य स्थित मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। परिसर में महाप्रभु वल्लभाचार्य की प्रतिमा, बैठक स्थल, चरणचिह्न और यज्ञशाला श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां प्रतिदिन पूजा, आरती, भजन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।
जयंती उत्सव में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
महाप्रभु वल्लभाचार्य जयंती के अवसर पर यहां विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। भजन, संकीर्तन, कथा और प्रवचनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। इस दौरान छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक भी देखने को मिलती है।
धार्मिक पर्यटन का बन रहा प्रमुख केंद्र
रायपुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित चंपारण्य धाम सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह स्थल राजिम और सिरपुर जैसे धार्मिक केंद्रों के साथ छत्तीसगढ़ के धार्मिक पर्यटन को नई पहचान दे रहा है।
