रायपुर, 06 मई। Kopra Reservoir : छत्तीसगढ़ के कोपरा जलाशय को राज्य का पहला रामसर स्थल घोषित किए जाने के बाद इसके संरक्षण और सतत विकास के लिए सामुदायिक भागीदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। स्थानीय समुदाय, वन विभाग और विशेषज्ञों के समन्वय से इस आर्द्रभूमि को एक आदर्श संरक्षण मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है।
जनभागीदारी से तैयार हुआ संरक्षण का ब्लूप्रिंट
रामसर दर्जा मिलने के बाद इसके अंतरराष्ट्रीय महत्व को ध्यान में रखते हुए राज्य वेटलैंड प्राधिकरण, ग्राम प्रतिनिधियों और महिला स्व-सहायता समूहों के बीच हुई बैठक में एक समग्र रणनीति पर सहमति बनी। इसका उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय आजीविका को भी मजबूत करना है।
स्वच्छता अभियान और प्लास्टिक मुक्त जलाशय की पहल
परियोजना के प्रथम चरण में कोपरा जलाशय को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत गांवों में ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी और नियमित स्वच्छता अभियान चलाए जाएंगे, जिससे जलाशय का पारिस्थितिकी तंत्र सुरक्षित रह सके।
निगरानी तंत्र होगा और मजबूत
आर्द्रभूमि की पारिस्थितिकी और जल गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए अवैध गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी। दुर्लभ जीव-जंतुओं और प्राकृतिक वनस्पतियों के संरक्षण के लिए आधुनिक निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहे।
ईको-टूरिज्म से खुलेगा रोजगार का नया रास्ता
अधिकारियों के अनुसार, जलाशय में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित कर बर्ड वॉचिंग और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और आर्थिक सशक्तिकरण को गति मिलेगी।
युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
इस पहल को सफल बनाने के लिए स्थानीय युवाओं को “वेटलैंड मित्र” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। महिला स्व-सहायता समूह स्वच्छता, जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। साथ ही स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा के माध्यम से बच्चों को इस धरोहर के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाएगा। राज्य वेटलैंड प्राधिकरण द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। विभिन्न विभागों और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से एकीकृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जो पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय सशक्तिकरण का संतुलित उदाहरण बनेगी।

