रायपुर, 02 मई। Mann KI Baat : छत्तीसगढ़ का बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य इन दिनों वन्यजीव संरक्षण की शानदार सफलता के कारण देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कभी यहां से लगभग विलुप्त हो चुके काले हिरण (ब्लैकबक) अब फिर से बड़ी संख्या में नजर आने लगे हैं, जिनकी आबादी 200 के करीब पहुंच चुकी है। यह उपलब्धि वर्षों की वैज्ञानिक योजना, सतत निगरानी और प्रशासनिक प्रतिबद्धता का परिणाम है।
प्रधानमंत्री की सराहना से बढ़ा गौरव
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस पहल का उल्लेख कर इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इससे छत्तीसगढ़ के इस प्रयास को देशभर में सराहना मिली और यह वन्यजीव संरक्षण के एक मॉडल के रूप में उभरा।
वैज्ञानिक रणनीति से हुआ पुनर्वास
1970 के दशक में यहां से गायब हो चुके ब्लैकबक को वर्ष 2018 में शुरू की गई पुनरुद्धार योजना के तहत वापस लाया गया। फरवरी 2026 में 30 काले हिरणों को ‘सॉफ्ट रिलीज’ तकनीक से उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक थी, जिससे उन्हें नए वातावरण में सहज रूप से ढलने में मदद मिली।
तकनीक और टीमवर्क की अहम भूमिका
वन विभाग ने हाई-टेक निगरानी, जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग के जरिए इन वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। अधिकारियों, जीव वैज्ञानिकों और फील्ड स्टाफ की समर्पित टीम ने इस मिशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रामपुर ग्रासलैंड बना सुरक्षित आश्रय
अभ्यारण्य के भीतर विकसित रामपुर ग्रासलैंड इस सफलता की रीढ़ साबित हुआ है। यहां प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण, घास की स्थानीय प्रजातियों का संवर्धन और अनुकूल आवास तैयार किया गया, जिससे काले हिरणों को सुरक्षित वातावरण मिला।
स्थानीय समुदाय की सहभागिता
इस पहल में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी भी बेहद अहम रही है। मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व का यह मॉडल न केवल संरक्षण को मजबूत करता है, बल्कि भविष्य के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। बारनवापारा की यह सफलता दर्शाती है कि सही नीति, तकनीक और सामूहिक प्रयासों से विलुप्त होती प्रजातियों को फिर से जीवित किया जा सकता है। यह मॉडल आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो सकता है।

