रायपुर, 02 मई। Ancient Manuscripts : ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के कांकेर जिला से एक बड़ी सांस्कृतिक उपलब्धि सामने आई है। अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम कोलर में सर्वेक्षण दल को प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियों का अमूल्य संग्रह प्राप्त हुआ है, जो क्षेत्र की समृद्ध परंपरा का जीवंत प्रमाण है।
ताड़पत्र में सुरक्षित दुर्लभ ग्रंथ
देहारीपारा में स्वतंत्रता सेनानी चिटु देहारी के यहां ताड़पत्र पर संरक्षित 7 महत्वपूर्ण पांडुलिपियां मिली हैं। इनमें नामरत्न गीता, लक्ष्मी पुराण, देवी भागवत, कृपा सिंधु, कॉग बोली, पांजी संगनेष्ठी और भागवत पुराण जैसी कृतियां शामिल हैं, जो प्राचीन ज्ञान और धार्मिक परंपराओं को दर्शाती हैं।
लरिया भाषा में भी मिला संग्रह
कुशल राम देहारी और मंगल राम देहारी के यहां से लरिया भाषा में लिखी 5 पांडुलिपियां भी मिली हैं, जिनमें गणेश पुराण, कलंकी कथा, नामरत्ना, ज्योतिषी और मृगणी स्तुति जैसी रचनाएं शामिल हैं। यह खोज स्थानीय भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इतिहास और परंपरा को समझने में मदद
इन पांडुलिपियों का अध्ययन क्षेत्रीय इतिहास, लोक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को समझने में अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही यह खोज आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी ज्ञान संपदा की ओर भी संकेत करती है।
संरक्षण के लिए अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास भी कोई प्राचीन दस्तावेज या पांडुलिपि सुरक्षित है, तो वे उसे सूचीबद्ध कराने में सहयोग करें, ताकि इस अमूल्य विरासत को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।

