रायपुर, 30 अप्रैल। NRLM : छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और पशुपालन आधारित आजीविका को मजबूत करने की दिशा में “पशु सखी” मॉडल एक प्रभावी पहल के रूप में उभर रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त किया जा रहा है।
बलरामपुर जिले में 30 पशु सखियों के लिए 17 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। यह प्रशिक्षण ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में संचालित हो रहा है, जहां महिलाओं को पशुपालन की आधुनिक तकनीकों और व्यावहारिक पहलुओं की गहन जानकारी दी जा रही है।
तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान पशुओं की देखभाल, संतुलित आहार, नियमित टीकाकरण, नस्ल सुधार, रोगों की पहचान और प्राथमिक उपचार जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं। साथ ही पशु चिकित्सालय और गौशालाओं के भ्रमण के जरिए जमीनी स्तर पर व्यावहारिक अनुभव भी दिया जा रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल
जिला पंचायत बलरामपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर के अनुसार, पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और “पशु सखी” जैसी पहलें महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इससे पशुपालकों को समय पर मार्गदर्शन और सेवाएं मिलेंगी, जिससे उत्पादन और आय में वृद्धि होगी।
रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह
प्रदेश में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ा रहे हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, पशुधन स्वास्थ्य सुधार और सतत ग्रामीण विकास को गति मिल रही है। प्रशिक्षित पशु सखियां अब अपने गांवों में पशुपालन सेवाओं की मजबूत कड़ी बनकर उभरेंगी।
आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की ओर कदम
“पशु सखी” मॉडल न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है, बल्कि गांवों में पशुपालन को एक संगठित और लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित कर रहा है, जो आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

