रायपुर, 07 अप्रैल। Naxal Rehabilitation : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पुनर्वास नीति के तहत कोण्डागांव जिले में हिंसा का रास्ता छोड़ चुके लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रभावी पहल की जा रही है। जिले का पुनर्वास केंद्र आज नवजीवन और उम्मीद का प्रतीक बन चुका है।
48 पुनर्वासित व्यक्तियों को मिल रहा लाभ
जिले में वर्तमान में 48 पुनर्वासित व्यक्तियों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।
रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण पर फोकस
पुनर्वासित व्यक्तियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं:
- असिस्टेंट शटरिंग कारपेंटर
- गार्डनर
- वाहन मेकेनिक
- इलेक्ट्रिशियन
- सिलाई-कढ़ाई
इन प्रशिक्षणों का उद्देश्य उन्हें रोजगार के योग्य बनाना और आर्थिक रूप से सशक्त करना है।
पहले चरण में 38, वर्तमान में 10 प्रशिक्षणरत
अब तक 38 व्यक्तियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वर्तमान में लाईवलीहुड कॉलेज में 10 लोग प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिनमें 7 सिलाई और 3 इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। मड़हो बाई कोर्राम और हाड़ोबाई सोडी सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। वहीं मोहन कोर्राम, जो पहले माओवादी संगठन से जुड़े थे, अब सिलाई सीखकर शांतिपूर्ण जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
आत्मनिर्भरता और सम्मान की ओर कदम
राज्य शासन द्वारा प्रशिक्षण के साथ-साथ आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वरोजगार की सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं। यह पहल पुनर्वासित लोगों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर दे रही है। पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाओं के संयुक्त प्रयास से कोण्डागांव में पुनर्वासित लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। यह पहल शांति, विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

