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Sant Siyaram Baba Death : खरगोन के प्रसिद्ध संत सियाराम का निधन, 110 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, प्रदेश में शोक की लहर

Sant Siyaram Baba Death

खरगोन। देशभर में अपने तप और त्याग के लिए प्रसिद्ध निमाड़-मालवा के संत सियाराम बाबा का बुधवार की सुबह मोक्षदा एकादशी के दिन निधन हो गया। बता दें कि 110 वर्ष की आयु में बाबा ने सुबह 6:10 बजे अंतिम सांस ली। मिली जानकारी के मुताबिक बाबा पिछले 10 दिनों से निमोनिया से पीड़ित थे।

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बाबा हनुमान जी के परम भक्त थे और हमेशा रामायण का पाठ करते थे। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गयी है। बाबा का अंतिम संस्कार शाम 4 बजे नर्मदा नदी के किनारे भटयान आश्रम के तट पर किया जाएगा। बाबा के अंतिम संस्कार में सीएम मोहन यादव समेत बड़ी संख्या में अनुयायी शामिल होंगे।

Sant Siyaram Baba Death

बता दें कि संत सियाराम का जीवन त्याग तपस्या से परिपूर्ण है। वह मां नर्मदा, भगवान राम और हनुमान जी के अनन्य भक्त थे। बाबा 110 की उम्र में भी रामचरित्र मानस का रोजाना पाठ किया करते थे। वहीं अनुयायी बताते हैं उनकी दिनचर्या भगवान राम और मां नर्मदा की उपासना से शुरू होती थी और इसी के साथ समाप्त भी होती थी। आश्रम में 24 घंटे रामधुन होती थी। बाबा श्रद्धालुओं को खुद ही चाय बनाकर प्रसाद स्वरूप पिलाया करते थे।

सियाराम बाबा का जन्म गुजरात के भावनगर में हुआ था। मात्र 17 वर्ष की आयु में ही उन्होंने आध्यात्मिक जीवन की राह पकड़ ली। और 1962 में वे खरगोन के कसरावद आए और भाटिया आश्रम में तपस्या शुरू कर दी। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने 10 वर्षों तक खड़े रहकर कठोर तपस्या की है। बाबा ने अपनी तपस्या के बाद पहला शब्द “सियाराम” बोला, जिसके बाद से उनके भक्तों ने उन्हें “सियाराम बाबा” नाम दिया।

बाबा की साधना की शक्ति इतनी थी कि वे बिना चश्मे के रामायण की चौपाइयां पढ़ते थे। चाहे सर्दी हो या गर्मी, बाबा हमेशा एक लंगोटी धारण करके ही रहते थे। उनकी सरल जीवन शैली और तपस्वी स्वभाव ने उन्हें भक्तों के बीच अमर बना दिया।

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दान में लेते थे सिर्फ 10 रुपये

संत सियाराम बाबा मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के नर्मदा नदी के घाट पर स्थित भट्याण आश्रम के संत थे, वे यहीं पर रहते थे और बहुत कम बोलते थे। बाबा के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते थे। सबसे खास बात यह है कि ये बाबा अपने भक्तों दान में सिर्फ 10 रुपये ही लेते थे।

अगर कोई भक्त 10 रुपये से अधिक दान में देता था तो उसे 10 रुपये लेकर बाकी के पैसे लौटा देते थे। सबसे खास बात यह है कि यह 10 रुपये भी वे समाज के कल्याण में लगा देते थे। बताया जाता है कि संत सियाराम बाबा नर्मदा नदी के घाट पर मरम्मत के लिए करीब 2 करोड़ 57 लाख रुपए दान किए थे।

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