CHHATTISGARH NEWS
राजनांदगांव। छत्तीगढ़ के राजनांदगांव जिले से गभर्पात कराने का मामला सामने आया हैं। जहां पीड़िता के पैरेंट्स ने गर्भपात के लिए हाकोर्ट में अपील दायर की थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया हैं। कोर्ट ने कहा कि भ्रूण हत्या नैतिक और कानूनी रूप से स्वीकार नहीं है।
बता दें कि हाइकोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए प्रसूता के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर सभी खर्च राज्य सरकार को वहन करने का आदेश दिया है।
गर्भपात कराना कानूनी जुर्म
जानकारी के अनुसार, राजनांदगांव की एक नाबालिग के साथ कुछ महीने पहले दुष्कर्म हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई। जब उसके परिवार को गर्भवती होने की जानकारी मिली, तो उन्होंने गर्भपात कराने के लिए अस्पताल का रुख किया। लेकिन मेडिकल और कानूनी जटिलताओं के कारण गर्भपात संभव नहीं हो पाया। पीड़िता के माता-पिता अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे।
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गर्भपात के लिए हाईकोर्ट में याचिका
इसके बाद, पीड़िता के माता-पिता ने गर्भपात के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। लेकिन पीड़िता का गर्भ 32 हफ्तों का था, और गर्भपात करने से उसकी जान को खतरा हो सकता था, इसलिए कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
पीड़िता में भर्ती का खर्चा राज्य सरकार उठाएंगी
हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की एकल बेंच ने की। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह बच्चे को गोद लेने की व्यवस्था करे। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता 8 महीने की गर्भवती है, और ऐसे में गर्भपात से उसकी जान को खतरा हो सकता है। इसलिए, पीड़िता की अस्पताल में भर्ती से लेकर सभी खर्चे राज्य सरकार उठाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पीड़िता और उसके माता-पिता चाहें, तो कानूनी प्रावधानों के तहत बच्चे को गोद लेने की अनुमति दी जा सकती है।

