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Sheetala Ashtami 2024 : शीतला अष्टमी पर्व पर करें ये उपाय, जीवन में नहीं आएगा कोई संकट, इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा

Sheetala Ashtami 2024

हिन्दू पंचांग के अनुसार होली के आठवें दिन यानी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन शीतला अष्टमी का व्रत रखा जाता है। बहुत सी जगहों पर इस दिन को बसौड़ा पर्व के नाम से भी जाना जाता है। बसौड़ा अर्थात बासी भोजन। इस नाम के पीछे की वजह यह है कि शीतला अष्टमी के दिन मां शीतला को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। इस वर्ष शीतलाष्टमी 1 अप्रैल को मनाया जा रहा है।

इस दिन विवाहित स्त्रियां अपने घर की सुख समृद्धि, अपने संतान की निरोगी व लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। इस पर्व की मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से बच्चों को चेचक, खसरा और आंखों की बीमारियां आदि नहीं होती है। शीतला अष्‍टमी का त्‍योहार उत्तर भारत के कुछ राज्‍यों जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्‍ली, हरियाणा और राजस्‍थान में काफी श्रद्धा और आस्‍था के साथ मनाया जाता है।

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Sheetala Ashtami 2024

शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 01 अप्रैल रात्रि 09:09 पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 02 अप्रैल रात्रि 08:10 पर होगा। ऐसे में शीतला अष्टमी व्रत 02 अप्रैल 2024, मंगलवार के दिन रखा जाएगा। इस विशेष दिन पर पूजा मुहूर्त सुबह 06:10 से संध्या 06:40 के बीच रहेगा।

शीतला अष्टमी की पूजा विधि
शीतला अष्टमी के शुभ अवसर पर सुबह जल्दी स्नान-ध्यान करके साफ वस्त्र धारण करें और इसके बाद दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। ऐसा करने के बाद पूजा स्थल पर माता शीतला की गंध, पुष्प, धूप, दीप इत्यादि से विधिवत पूजा करें और रबड़ी, चावल या पंच फल का भोग अर्पित करें। पूजा के दौरान शीतला माता के मंत्रों का जाप करें और शीतला स्तोत्र का पाठ जरूर करें। शीतला माता की आरती के साथ पूजा संपन्न करें।

शीतला अष्टमी के दिन इन चीजों का करें दान:-

Sheetala Ashtami 2024

मंत्र और पाठ करें
मां का पौराणिक मंत्र ‘ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः’ मनुष्यों को सभी संकटों से मुक्ति प्रदान कर समाज में मान-सम्मान,पद व गरिमा की वृद्धि कराता है।

शीतला अष्टमी का महत्व
स्कंद पुराण के अनुसार, ब्रह्मा जी ने सृष्टि को रोगमुक्त और स्वच्छ रखने का कार्य शीतला माता को दिया हुआ है। इसलिए स्वच्छता की देवी के रूप में भी इनकी पूजा की जाती है। शीतला अष्टमी के दिन पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और ध्यान रखें कि जल शीतल हो। इस उपाय के पीछे अध्यात्मिक व वैज्ञानिक दोनों कारण हैं। शीतल जल ग्रीष्म ऋतू का संकेत है और इससे मनुष्य का शरीर कई प्रकार के रोग से दूर रहता है।

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