Vijay Shah Sofia Qureshi Case
मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह द्वारा सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए आपत्तिजनक बयान को लेकर शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया में नया मोड़ आ गया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए की गई अदालती कार्रवाई को अब बंद कर दिया है।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद लिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने 28 मई को हाईकोर्ट से निवेदन किया था कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ चल रही कार्रवाई को स्थगित कर दिया जाए क्योंकि यह मामला अब उसके समक्ष लंबित है। इसी आधार पर हाईकोर्ट की युगलपीठ—न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह—ने 17 जून को यह कार्रवाई समाप्त कर दी।
Vijay Shah Sofia Qureshi Case
इससे पहले हाईकोर्ट ने मंत्री के बयान को “गटर भाषा” करार देते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। 14 मई को BNS की धाराओं 152, 196(1)(B), और 197(1)(C) के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश हुआ, और मानपुर थाने में एफआईआर हुई भी। लेकिन अगले ही दिन कोर्ट ने दर्ज एफआईआर को “कमजोर और असंतोषजनक” बताया। इसके बाद कोर्ट ने अपराध का स्पष्ट विवरण शामिल करते हुए नई एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि मंत्री का बयान न केवल सेना अधिकारी के खिलाफ अभद्र था, बल्कि यह मुस्लिम समुदाय के प्रति वैमनस्य फैलाने की प्रवृत्ति भी दर्शाता है।
Vijay Shah Sofia Qureshi Case
समानांतर केस अपडेट:
इसी दौरान जबलपुर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने एक अन्य महत्वपूर्ण आदेश में दुष्कर्म पीड़िता के सुरक्षित गर्भपात के निर्देश भी जारी किए हैं। सागर की एक नाबालिग और दिव्यांग लड़की के मामले में कोर्ट ने सरकार से कहा है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में गर्भपात कराया जाए और यदि बच्चा जीवित जन्म लेता है, तो सरकार उसकी जिम्मेदारी उठाएगी।
एक तरफ मंत्री के बयान पर संवेदनशील रुख अपनाने वाले हाईकोर्ट को अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पीछे हटना पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ महिला अधिकारों और संवेदनशील मामलों पर कोर्ट की सतर्कता और संवेदनशीलता भी सामने आई है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है, जहां से अगले निर्देश की प्रतीक्षा रहेगी।
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