Sarai Kale Khan ISBT Name Changed
नई दिल्ली। दिल्ली के सराय काले खां चौक का नाम बदलकर ‘बिरसा मुंडा चौक’ कर दिया गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के ऐतिहासिक अवसर पर बिरसा मुंडा की प्रतिमा का अनावरण किया। यह आयोजन बांसेरा उद्यान में हुआ, जो दिल्ली के विकास और आदिवासी नायकों को सम्मान देने के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

इसी कड़ी में अमित शाह ने कहा कि आदिवासियों ने देश भर में अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़ कर भाग लिया, लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद इन महानायकों को भुला दिया गया। तो वहीं केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने घोषणा की दिल्ली के रिंग रोड पर स्थित सराय काले खां चौक का नाम बदलकर भगवान बिरसा मुंडा चौक कर दिया गया है।

चौक का नाम बदलने पर दिल्ली की आम आदमी पार्टी ने नाराजगी जताते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, केंद्र सरकार के फैसले का शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल ने स्वागत किया था।
Sarai Kale Khan ISBT Name Changed
14वीं शताब्दी में हुए सूफी संत काले खां
बता दें कि काले खां 14वीं शताब्दी के एक महान सूफी संत हुआ करते थे, जो शेरशाह सूरी के समय में ही हुए थे। समय के साथ चीजें बदली आगे चलकर मुगल शासन काल में दिल्ली स्थित इस आश्रय स्थल यानी सराय के साथ उनका नाम काले खां जोड़ दिया गया और इसके साथ ही यह सराय काले खां के नाम से फेमस हो गया।
कौन थे भगवान बिरसा मुंडा?
स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा का जन्म 1875 में वर्तमान झारखंड में हुआ था। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश शासन को चुनौती दी थी और उन्हें साम्राज्य के खिलाफ आदिवासियों को संगठित करने का श्रेय दिया जाता है। 25 साल की छोटी उम्र में ब्रिटिश हिरासत में उनकी मृत्यु हो गई।


