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Ranu Sahu Case : कोयला घोटाले में फंसी रानू साहू की मुश्किलें बढ़ीं…! तुलसी गांव स्थित संपत्तियों की जांच की जिम्मेदारी PWD को

Ranu Sahu Case: Troubles of Ranu Sahu, who is stuck in coal scam, increased...! PWD has been given responsibility to investigate the properties located in Tulsi village

Ranu Sahu Case

रायपुर, 29 अगस्त। Ranu Sahu Case : कोयला और डीएमएफ घोटाले में गिरफ्तार और वर्तमान में अंतरिम जमानत पर बाहर चल रहीं निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू की मुश्किलें फिर से गहरा गई हैं। इस बार मामला उनकी संपत्तियों की जांच से जुड़ा है। रायपुर PWD विभाग को गरियाबंद जिले के तुलसी गांव स्थित रानू साहू के मकान, फार्म हाउस और दुकानों की विस्तृत जांच का जिम्मा सौंपा गया है।

जांच के दायरे में क्या होगा?

PWD की टीम निम्न बिंदुओं की जांच करेगी, इमारतों का निर्माण कब हुआ? निर्माण में कितना खर्च आया? आज की तारीख में इनकी बाजार कीमत क्या है? झूमर, फॉल सीलिंग, मॉड्यूलर किचन, महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स, इंटीरियर और फर्नीचर की लागत क्या है? जांच रिपोर्ट सीधे ईओडब्ल्यू (EOW) को सौंपी जाएगी, जो आय और व्यय के असंतुलन के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

नियमों के विरुद्ध निर्माण

जानकारी के अनुसार, जिन संपत्तियों की जांच हो रही है वे कृषि भूमि पर बिना पंचायत की NOC के बनाई गई हैं, जो कानूनन प्रतिबंधित है। इससे पहले राजस्व विभाग ने इस जमीन को सील भी किया था। वर्तमान में यहां “धूम कैलिफोर्निया” नाम से एक रेस्टोरेंट संचालित हो रहा है।

जमीन किसके नाम?

तुलसी गांव स्थित 0.622 हेक्टेयर भूमि रानू साहू के रिश्तेदार अरुण कुमार साहू और लक्ष्मी साहू के नाम पर दर्ज है। इन्हीं के नाम पर फार्म हाउस और मकान का निर्माण भी हुआ है। प्रारंभिक जांच में इन पर ‘बेनामी संपत्ति’ का संदेह जताया गया है। बता दें कि, रानू साहू को 22 जुलाई 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोयला और जिला खनिज निधि (DMF) घोटाले में गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 3 मार्च 2025 को सशर्त जमानत दी थी। कोर्ट का स्पष्ट निर्देश था कि वह राज्य से बाहर रहेंगी, और केवल जांच या कोर्ट पेशी के लिए छत्तीसगढ़ आ सकेंगी। PWD और EOW की यह संयुक्त कार्रवाई रानू साहू की जमानत शर्तों पर भी असर डाल सकती है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति या अनियमित निर्माण की पुष्टि होती है, तो उनके खिलाफ नई कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है। जेल से बाहर आने के बाद भले ही रानू साहू सार्वजनिक रूप से शांत हों, लेकिन जांच एजेंसियों की निगरानी अब भी उन पर कायम है। तुलसी गांव की संपत्तियों को लेकर जारी यह नई जांच रानू साहू के लिए एक और कानूनी मोर्चा खोल सकती है। आगामी कार्रवाई अब इस जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी कि रानू साहू की संपत्तियां नियमों के तहत हैं या नहीं।
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