Raipur Sky Walk : रायपुर स्काईवॉक को मिली नई ज़िंदगी, 8 साल बाद फिर शुरू होगा निर्माण, PSA कंस्ट्रक्शन को मिला टेंडर

Raipur Sky Walk : रायपुर स्काईवॉक को मिली नई ज़िंदगी, 8 साल बाद फिर शुरू होगा निर्माण, PSA कंस्ट्रक्शन को मिला टेंडर

Raipur Sky Walk

हाईलाइट्स:

  • 8 साल से अधूरा पड़ा स्काईवॉक प्रोजेक्ट अब होगा पूरा।
  • राज्य सरकार ने 37.75 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की।
  • रायपुर की PSA कंस्ट्रक्शन को मिला टेंडर।
  • निर्माण कार्य पुरानी डिजाइन और ड्राइंग के आधार पर ही होगा।
  • कार्य गुणवत्ता और समय सीमा के भीतर पूरा करना अनिवार्य।

रायपुर। राजधानी रायपुर में पिछले आठ सालों से अधर में लटका स्काईवॉक प्रोजेक्ट अब एक बार फिर रफ्तार पकड़ने जा रहा है। राज्य सरकार ने इस अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने पुराने डिजाइन के अनुसार ही स्काईवॉक का निर्माण कार्य फिर से शुरू करने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए लोक निर्माण विभाग ने निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली है और रायपुर की ही निर्माण कंपनी पीएसए कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को यह टेंडर सौंपा गया है। कंपनी को यह काम 37 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत पर सौंपा गया है।

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स्काईवॉक प्रोजेक्ट को सबसे पहले 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सरकार ने मंजूरी दी थी। उस समय पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत ने इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की थी। शास्त्री चौक और मेकाहारा चौक जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों में पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस स्काईवॉक की परिकल्पना की गई थी।

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सर्वे रिपोर्ट में यह सामने आया था कि शास्त्री चौक से प्रतिदिन करीब 27,000 और मेकाहारा चौक से लगभग 14,000 लोग पैदल गुजरते हैं। इसी के आधार पर लगभग 1.47 किलोमीटर लंबे स्काईवॉक का निर्माण तय किया गया था, जिसमें दस सीढ़ियां, आठ एस्केलेटर और दो लिफ्ट लगाने की योजना बनाई गई थी।

हालांकि, सरकार बदलने के बाद साल 2019 में कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने इस परियोजना को रोक दिया। कांग्रेस का आरोप था कि यह प्रोजेक्ट बिना जरूरी मंजूरी के जल्दबाजी में शुरू किया गया और इसकी लागत में भी भारी गड़बड़ियां थीं। कांग्रेस ने इसे भाजपा सरकार का भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया और इसका काम रुकवा दिया। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस परियोजना पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका, सिर्फ एक सुझाव समिति बनी जिसने यह सिफारिश की कि इस ढांचे को गिराया न जाए क्योंकि इसमें पहले ही करीब 45 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

इस बीच स्काईवॉक अधूरा ही खड़ा रहा। कुछ सौंदर्यीकरण के प्रयास जरूर हुए—पिलर पर वर्टिकल गार्डन लगाए गए, पेंटिंग कराई गई—लेकिन निर्माण कार्य नहीं बढ़ सका। समय के साथ ढांचे की हालत भी बिगड़ती चली गई और यह शहर के बीचोंबीच खड़े एक अधूरे वादे की तरह बनकर रह गया।

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अब जब राज्य में फिर से भाजपा की सरकार बनी है और विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री बने हैं, तो इस ठप पड़े प्रोजेक्ट को दोबारा ज़िंदा किया गया है। सरकार ने 37.75 करोड़ रुपये की स्वीकृति देकर काम फिर से शुरू करने का आदेश जारी किया है। PSA कंस्ट्रक्शन ने इस काम के लिए अनुमानित लागत से 20 प्रतिशत अधिक दर पर निविदा भरी थी, जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है।

निर्माण कार्य पुराने स्वीकृत डिजाइन के अनुसार ही किया जाएगा और इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि काम तय समय सीमा में, गुणवत्ता के साथ और निर्धारित बजट के भीतर पूरा हो। यह भी साफ कर दिया गया है कि यह प्रोजेक्ट किसी अन्य को सबलेट नहीं किया जा सकेगा और न ही किसी को पावर ऑफ अटॉर्नी दी जाएगी।

राजधानी के लोगों को अब उम्मीद है कि जो स्काईवॉक पिछले आठ वर्षों से अधूरा पड़ा था, वह जल्द ही पूरा होगा और शहर को एक आधुनिक पैदल यात्री सुविधा मिलेगी। रायपुर का यह स्काईवॉक न केवल एक संरचना है, बल्कि वर्षों से अधूरे वादों और राजनीतिक खींचतान का प्रतीक भी बन चुका था। अब जब सरकार ने इसे पूरा करने की ठोस पहल की है, तो यह न केवल शहर की तस्वीर बदलेगा, बल्कि नागरिकों के भरोसे को भी एक नई मजबूती देगा।

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