Maha Shivratri 2025 : भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का अवसर, 60 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, महाशिवरात्रि 2025 को बना रहा है और भी विशेष!

Maha Shivratri 2025 : भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का अवसर, 60 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, महाशिवरात्रि 2025 को बना रहा है और भी विशेष!

Maha Shivratri 2025

रायपुर। महाशिवरात्रि 2025 इस बार एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग लेकर आ रही है। 26 फरवरी, बुधवार को पड़ने वाली इस महाशिवरात्रि पर ‘बुधादित्य योग’ और ‘त्रिग्रही योग’ का विशेष संयोग बन रहा है, जो लगभग 60 वर्षों बाद घटित हो रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन आध्यात्मिक और भौतिक लाभों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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महाशिवरात्रि 2025 केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली ज्योतिषीय संयोग का अवसर है। इस शुभ दिन भगवान शिव की भक्ति और साधना से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होगी। 60 वर्षों बाद बनने वाला यह संयोग इसे और भी विशेष बना देता है, इसलिए इसे पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से मनाना चाहिए।

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जानिए क्या है यह दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग?
  • बुधादित्य योग: जब सूर्य और बुध एक ही राशि में स्थित होते हैं, तब यह शुभ योग बनता है। इस वर्ष, ये दोनों ग्रह कुंभ राशि में स्थित होंगे, जिससे यह योग अत्यधिक प्रभावशाली रहेगा।
  • त्रिग्रही योग: इस महाशिवरात्रि पर सूर्य, बुध और शनि तीनों ग्रह कुंभ राशि में होंगे, जिससे यह विशेष त्रिग्रही योग बनेगा। यह संयोग न केवल शिवभक्तों के लिए बल्कि समस्त ज्योतिष प्रेमियों के लिए भी अत्यंत शुभ माना जा रहा है।
  • श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्र का संयोग: इन नक्षत्रों के प्रभाव से भगवान शिव की आराधना करने वालों को विशेष फल की प्राप्ति होगी।
  • परिघ योग और शिव योग: इन दो योगों के बनने से महाशिवरात्रि की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है, जिससे इस दिन की गई पूजा और अनुष्ठान कई गुना अधिक फलदायी होंगे।

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महाशिवरात्रि 2025 की पूजा का महत्व

महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। भक्त इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप करते हैं।

चार प्रहर की पूजा के समय:
  • प्रथम प्रहर: शाम 6:19 बजे से रात 9:26 बजे तक
  • द्वितीय प्रहर: रात 9:26 बजे से मध्यरात्रि 12:34 बजे तक
  • तृतीय प्रहर: मध्यरात्रि 12:34 बजे से तड़के 3:41 बजे तक
  • चतुर्थ प्रहर: तड़के 3:41 बजे से सुबह 6:48 बजे तक
इस दिन की गई पूजा से मिलने वाले लाभ
  • भगवान शिव की कृपा से सभी प्रकार के कष्टों का निवारण होता है।
  • जीवन में धन, यश और समृद्धि आती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति और मन की शांति प्राप्त होती है।
  • कुंडली में ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है, विशेष रूप से शनि, सूर्य और बुध के अशुभ प्रभाव से राहत मिलती है।

Maha Shivratri 2025

कैसे करें इस विशेष महाशिवरात्रि पर पूजा?
  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • शिवलिंग पर गंगा जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र चढ़ाएं।
  • रात्रि जागरण करें और चारों प्रहर की पूजा करें।
  • ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें और रुद्राभिषेक करें।
  • जरूरतमंदों को दान करें और शिव परिवार की आराधना करें।

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