Kunwara Panchami 2024 : क्या होता है कुंवारा पंचमी श्राद्ध, जानें पितृ पक्ष में क्‍या है इस दिन का महत्‍व? जानें नियम

Kunwara Panchami 2024 : क्या होता है कुंवारा पंचमी श्राद्ध, जानें पितृ पक्ष में क्‍या है इस दिन का महत्‍व? जानें नियम

Kunwara Panchami 2024

रायपुर। गुरुड़ पुराण और अन्य पुराणों में पितरों की महीमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष के 15-16 दिनों में पितरों को खुश करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। वैसे तो पितृ पक्ष में सभी तिथियां महत्वपूर्ण मानी गई हैं लेकिन कुछ ऐसी तिथियां है जिसमें श्राद्ध का महत्व अधिक होता है।

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इन्हीं में से एक है श्राद्ध पक्ष की पंचमी तिथि, इसे कुंवार पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं क्या है कुंवारा पंचमी, इसका महत्व। अश्‍व‍िन महीने की पंचमी तिथि को पंचमी श्राद्ध होता है। इसे कुंवारा पंचमी श्राद्ध भी कहते हैं। इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्‍यु पंचमी के दिन हुई हो या जिनकी मौत अविवाहित रहते हुए हो गई हो।

Kunwara Panchami 2024

कुंवारे लोगों की वजह से ही इसे कुंवारा पितृ भी कहते हैं। इस दिन लोग अपने कुंवारे भाई, भतीजे, भांजे और अन्य संबंधियों का पिंडदान करते हैं, जिनकी शादी होने से पहले ही मृत्यू हो गई थी। इस दिन राहुकाल में पिंडदान नहीं होता है। इसलिए कुंवारा पंचमी के दिन राहुकाल होने पर इससे पहले ही तर्पण और पिंडदान किया जाता है।

पितृ पक्ष पंचमी के 6 शुभ मुहूर्त
  • ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04.34 से लेकर सुबह 05.21 मिनट तक
  • अभिजित मुहूर्त- सुबह 11.50 से लेकर दोपहर 12.39 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त – शाम 06.31 से लेकर शाम 06.54 मिनट तक
  • विजय मुहूर्त- दोपहर 02.17 से लेकर दोपहर 03.06 मिनट तक
  • अमृत काल मुहूर्त- रात 08.48 से लेकर रात 10.17 मिनट तक
  • निशिता काल मुहूर्त- रात 11.50 से लेकर 23 सितंबर 12.38 मिनट तक

Kunwara Panchami 2024

अशुभ मुहूर्त-

पितृ पक्ष पर मुहूर्त का बहुत महत्व होता है। कभी भी अशुभ मुहूर्त पर श्राद्ध का काम नहीं करना चाहिए।

  • यमगण्ड – दोपहर 12.13 से लेकर दोपहर 01.44 बजे तक
  • गुलिक काल- दोपहर 03.15 से लेकर शाम 04.46 बजे तक
  • आडल योग – रात 11.02 से लेकर सुबह 06.02, 23 सितंबर तक
  • विडाल योग – सुबह 06.10 – रात 11.02 तक
पंचमी श्राद्ध पर क्‍या करें

पंचमी श्राद्ध के दिन सुबह उठकर स्नान कर देव स्थान और पितृ स्थान को गाय के गोबर से लेप लगाएं। इसके बाद उस स्‍थान पर गंगाजल छिड़कें। महिलाएं स्नान आदि के बाद पितरों के लिए भोजन बनाएं जैसे खीर, पूड़ी, कद्दू की सब्जी आदि। इसके बाद भोजन परोसने के लिए केले के पत्ते पर या मोहा नाम के वृक्ष के पत्तों से बनी पत्तल का प्रयोग करें।

इसके बाद कुंवारा पंचमी पर अविवाहित ब्राह्मण, घर की बहन-बेटी को भोजन के लिए न्योता दें। दोपहर के समय कुंवारे पितरों के नाम श्राद्ध कर्म करें, अग्नि को भोजन अर्पित करें। इसके बाद पंचबली भोग निकालें और फिर ब्राह्मण को भोजन खिलाएं। तत्प्श्चात बहन, ब्राह्मण को दान देकर आदर पूर्वक विदा करें।

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