KARREGUTTA NAXAL OPERATION  : कर्रेगुट्टा नक्सल ऑपरेशन, 21 दिन में 31 नक्सली ढेर, 450 IED बरामद, हथियार फैक्ट्रियां तबाह – PM मोदी बोले ‘जड़ से खत्म होगा नक्सलवाद

KARREGUTTA NAXAL OPERATION : कर्रेगुट्टा नक्सल ऑपरेशन, 21 दिन में 31 नक्सली ढेर, 450 IED बरामद, हथियार फैक्ट्रियां तबाह – PM मोदी बोले ‘जड़ से खत्म होगा नक्सलवाद

KARREGUTTA NAXAL OPERATION

छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में सुरक्षाबलों ने 21 अप्रैल से 11 मई तक एक बेहद गुप्त और व्यापक नक्सल विरोधी अभियान चलाया। यह ऑपरेशन देश के अब तक के सबसे बड़े माओवादी विरोधी अभियानों में गिना जा रहा है। 21 दिनों तक चले इस ऑपरेशन में कुल 31 वर्दीधारी नक्सलियों को मार गिराया गया, जिनमें 16 महिलाएं और 15 पुरुष शामिल थे। इनमें से 28 की पहचान हो चुकी है, जबकि 3 की शिनाख्त प्रक्रिया जारी है।

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इस ऑपरेशन में जवानों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, क्योंकि नक्सलियों ने पूरे इलाके को घेर कर 250 से ज्यादा गुफाओं में अपने ठिकाने बना रखे थे। उन्होंने न केवल बंकर बनाए थे, बल्कि बड़े माओवादी कैडर के इलाज के लिए एक अस्थायी अस्पताल और आधुनिक हथियार निर्माण के लिए चार फैक्ट्रियां भी स्थापित की थीं। इन फैक्ट्रियों में नक्सली लेथ मशीनों के माध्यम से BGL लॉन्चर, BGL सेल और अन्य हथियार बनाते थे। सुरक्षाबलों ने इन सभी संरचनाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

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सबसे बड़ी चुनौती थी पहाड़ों में बिछाए गए 450 IED, जिन्हें डिफ्यूज करके जवानों को आगे बढ़ना पड़ा। नए डीमाइनिंग उपकरणों की मदद से इन्हें नष्ट किया गया, जिससे यह साबित हुआ कि नक्सली किस हद तक विस्फोटकों का जाल बिछाकर सुरक्षा बलों को रोकने की कोशिश करते हैं।

इस ऑपरेशन में भारी मात्रा में नक्सलियों का हथियार, गोला-बारूद और रोजमर्रा का सामान भी बरामद हुआ। 818 BGL सेल, 899 कार्डेक्स विस्फोटक बंडल और चार लेथ मशीनें मिलने से साफ है कि यह इलाका नक्सलियों का बड़ा बेस बन चुका था। ऑपरेशन के दौरान कुल 214 बंकरों को नष्ट किया गया।

हालांकि यह सफलता आसान नहीं थी। ऑपरेशन के दौरान 18 जवान घायल हुए, जिनमें कुछ डिहाइड्रेशन के शिकार भी हुए, क्योंकि गर्मी और दुर्गम इलाका उनके लिए एक अतिरिक्त चुनौती बना।

ऑपरेशन की सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान देते हुए कहा कि यह सफलता दिखाती है कि नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने की दिशा में देश सही राह पर चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार शांति बहाली और विकास की मुख्यधारा में इन क्षेत्रों को शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर इस ऑपरेशन की सराहना की और कहा कि जिस जगह पर कभी लाल आतंक का राज था, अब वहां शान से तिरंगा लहरा रहा है। उन्होंने दोहराया कि 2026 तक भारत को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाया जाएगा। CRPF के डीजी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने भी यही बात दोहराई कि 31 मार्च 2026 तक देश के सभी नक्सलियों को या तो आत्मसमर्पण करना होगा या उन्हें खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में बस्तर और बीजापुर जैसे क्षेत्रों में नक्सलियों द्वारा नष्ट किए गए स्कूलों को फिर से स्थापित किया जाएगा।

वहीं कांग्रेस पार्टी ने इस ऑपरेशन को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने पूछा कि मारे गए लोगों की पहचान की पुष्टि किस आधार पर की गई? इसके अलावा, नक्सल प्रवक्ता ने एक पर्चा जारी करते हुए 26 नक्सलियों की मौत की पुष्टि की है और सरकार से शांति वार्ता पर स्पष्टता की मांग की है।

यह अभियान केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि सरकार की ओर से यह संदेश भी था कि अब नक्सलियों के सुरक्षित पनाहगाह भी निशाने पर हैं। बीते चार महीने में कुल 174 हार्डकोर नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं और सुरक्षाबलों की पकड़ बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे जिलों में लगातार मजबूत होती जा रही है।

इस ऑपरेशन के दूरगामी प्रभाव देखने को मिलेंगे और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त होकर विकास और शांति की ओर अग्रसर होगा।

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