
Headmaster drunk in school : राज्य की शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक घटना कोरबा जिले के करतला ब्लॉक से सामने आई है, जहां एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर शराब के नशे में धुत होकर स्कूल पहुंचे और पढ़ाई छोड़कर ऑफिस की टेबल पर गहरी नींद में खर्राटे लेते नजर आए। उनकी यह करतूत कैमरे में कैद हो गई और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया है।
स्कूल पहुंचते ही सो गए हेडमास्टर
Headmaster drunk in school : यह मामला ग्राम पंचायत जरवे स्थित शासकीय प्राथमिक शाला का है, जहां 46 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। शुक्रवार की सुबह स्कूल में शिक्षक देव प्रसाद बर्मन अपनी कक्षा को पढ़ा रहे थे, लेकिन उसी समय स्कूल के हेडमास्टर चंद्रपाल पैकरा शराब के नशे में ऑफिस पहुंचे और सीधे टेबल पर लेटकर खर्राटे लेने लगे। उन्हें कई बार आवाज दी गई, लेकिन वे नहीं जागे।
सवालों का जवाब देने में असमर्थ
Headmaster drunk in school : जब हेडमास्टर को आखिरकार जगाया गया, तो उनसे अंग्रेज़ी शब्द “Beautiful” की स्पेलिंग पूछी गई, जिस पर उन्होंने जवाब दिया कि उनकी अंग्रेजी कमजोर है। इसके बाद जब उनसे जिला कलेक्टर, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का नाम पूछा गया, तो वह कोई भी नाम नहीं बता सके। उनकी मानसिक स्थिति और लापरवाही स्पष्ट रूप से वीडियो में नजर आती है।
अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी
Headmaster drunk in school : स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह पहली बार नहीं है जब हेडमास्टर शराब पीकर स्कूल आए हों। उनका कहना है कि वह अक्सर इसी हालत में स्कूल पहुंचते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिक्षा विभाग पर भी उठे सवाल
Headmaster drunk in school : इस घटना के सामने आने के बाद, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्कूलों में नियमित निरीक्षण और अनुशासनात्मक कार्रवाई न होने के कारण इस तरह की घटनाएं बार-बार दोहराई जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते ऐसे शिक्षकों पर रोक नहीं लगाई गई, तो बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा।
निष्कर्ष: कब जागेगा शिक्षा तंत्र?
Headmaster drunk in school : छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहां शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लगातार चिंताएं जताई जा रही हैं, वहां हेडमास्टर जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे लोगों की यह लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों पर तुरंत संज्ञान ले, और दोषियों को निलंबित कर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करे। वरना आने वाली पीढ़ियों का भविष्य ऐसे ही शिक्षकों के कारण गुमनामी के अंधेरे में खो जाएगा।