रायपुर, 29 अगस्त। Education News : छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राज्य के शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे आरटीई (निःशुल्क शिक्षा का अधिकार अधिनियम) जैसे संवैधानिक अधिकार को कमजोर करने के षड्यंत्र में निजी स्कूल माफियाओं के साथ शामिल हैं। लोक आयोग द्वारा जारी किए गए समन के बावजूद शिक्षा सचिव अब तक उपस्थित नहीं हुए हैं, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि वे जवाबदेही से बचने की कोशिश क्यों कर रहे हैं।
बिना मान्यता वाले स्कूलों को संरक्षण देने का आरोप
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी ने शिक्षा विभाग और डीपीआई कार्यालय के अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे जानबूझकर बिना मान्यता वाले हजारों निजी स्कूलों को संरक्षण दे रहे हैं। इनमें से अधिकांश स्कूल रायपुर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में गली-मोहल्लों के किराये के मकानों में चल रहे हैं, जहाँ न तो कोई वैधानिक स्वीकृति है और न ही शिक्षा की गुणवत्ता का मानक। इन स्कूलों में पढ़ रहे हजारों छात्रों का UDISE (Unified District Information System for Education) आईडी तक नहीं बना है, जिससे उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड अधर में लटका हुआ है। साथ ही हर महीने पालकों से लाखों रुपये की अवैध फीस वसूली की जा रही है। विभागीय लापरवाही के चलते इन छात्रों के भविष्य पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। केपीएस स्कूल पर गंभीर आरोप, जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई शून्य कृष्णा पब्लिक स्कूल (KPS), रायपुर और इसके अंतर्गत चल रहे ‘कृष्णा किड्स एकेडमी’ के छह स्कूलों पर बिना मान्यता संचालन के आरोप विकास तिवारी द्वारा लोक आयोग में दायर शिकायत में लगाए गए थे। जांच समिति ने सभी आरोपों को सत्य पाया और रिपोर्ट संयुक्त संचालक को भेज दी गई। फिर भी, संयुक्त संचालक योगेश शिवहरे, जिला शिक्षा अधिकारी आर.एल. ठाकुर और हिमांशु भारतीय द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जो सवाल उठाता है कि क्या पूरा विभाग निजी स्कूल माफियाओं के दबाव में काम कर रहा है? गंभीर मामला तब सामने आया जब कृष्णा किड्स एकेडमी की एक छात्रा स्कूल वैन से गिर गई। उस वैन पर KPS सरोना (CBSE मान्यता प्राप्त) स्कूल का नाम दर्ज था, जो कि छात्रों और पालकों को भ्रमित करने की मंशा को दर्शाता है।
शिक्षा सचिव की निष्क्रियता पर उठे सवाल
विकास तिवारी ने बताया कि शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी को दो बार हाईकोर्ट और दो बार लोक आयोग द्वारा तलब किया गया, लेकिन वे लगातार अनुपस्थित रहे। इससे यह संदेह और प्रबल होता है कि वे खुद इस पूरे गैरकानूनी तंत्र को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने शिक्षा सचिव पर आरोप लगाया कि वे KPS स्कूलों के संरक्षक की भूमिका निभा रहे हैं और उनके संरक्षण में ये स्कूल आज भी चल रहे हैं। यह लोक सेवा के कर्तव्यों का घोर उल्लंघन है। छत्तीसगढ़ की शिक्षा प्रणाली आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ नीति और नैतिकता दोनों को ताक पर रख दिया गया है। यदि बिना मान्यता के स्कूलों को इसी तरह संरक्षण मिलता रहा और शिक्षा विभाग आंखें मूंदे बैठा रहा, तो न केवल गरीब छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा, बल्कि राज्य की पूरी शिक्षा व्यवस्था रसातल में चली जाएगी।

