धर्म डेस्क, 18 अगस्त। Durga Puja of Bengal : बंगाली संस्कृति में दुर्गा पूजा की आरंभिक गूंज को चिह्नित करने वाली महालया पर आधारित हैं। प्रतीक हैं माँ दुर्गा की पवित्र आराधना, चहुंओर व्याप्त उत्सव और पूजा के प्रारंभिक साक्ष्य।
महालय क्या है?
महालया हिंदू धर्म में पितृ पक्ष के समापन और देवीपक्ष (दुर्गा पूजा की प्रथम पूर्व संध्या) की शुरुआत का दिन है। इस दिन को महिषासुर वध और माँ दुर्गा के पृथ्वी आगमन का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार बंगाल में विशेष रूप से सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है, एक हफ्ता पहले से ही दुर्गा पूजा की तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं।
महालय कब मनाया जाएगा?
महालया 2025 रविवार, 21 सितंबर को पड़ रहा है। पितृ पक्ष इस वर्ष 7 सितंबर से 21 सितंबर तक रहेगा, और अंतिम दिन यानी 21 सितंबर को महालय मनाया जाएगा।
2025 का पूजा
महालय: 21 सितंबर (रविवार)
महाषष्ठी: 28 सितंबर (रविवार)
महासप्तमी: 29 सितंबर (सोमवार)
महाअष्टमी: 30 सितंबर (मंगलवार)
महानवमी: 1 अक्टूबर (बुधवार)
विजयदशमी (दशमी): 2 अक्टूबर (गुरुवार)
महालय पर कि जाने वाली विशिष्ट परंपराएँ
महिषासुर मार्दिनी एक मशहूर रेडियो प्रसारण है, जो 1931 से सुनने की परंपरावश तमाम बंगाली घरों में महालय की सुबह को परिभाषित करता है।
चक्षुदान
मूर्तिकार इस दिन माँ दुर्गा की आँखों को अंकित करते हैं, जिसे चक्षुदान कहते हैं, जिससे देवी की मूर्ति “जीवंत” प्रतीत होती है।
पितृ तर्पण
पितृ पक्ष की समाप्ति पर, नदियों या पवित्र स्थानों पर जाकर पिंडदान एवं तर्पण जैसे अनुष्ठानों का पालन किया जाता है।
अन्य आध्यात्मिक कर्म
परिवार में होलिया के रूप में हो या सार्वजनिक मंचों पर चंडी पाठ, भजन, लोकनृत्य, और परिवार एवं मित्रों के साथ पारंपरिक व्यंजन साझा करना आम है। बंगाल में इस दिन को “हर घर दुर्गा पूजा पहले से शुरू हो गई” जैसा अनुभव माना जाता है, शहरों में पंडालों की सजावट और आयोजन प्रारंभ हो चुके होते हैं।