रायपुर, 28 मई। Paddy Diversification Model : छत्तीसगढ़ शासन के छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की अभिनव पहल “पैडी डायवर्सन मॉडल” किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का नया रास्ता बनकर उभरी है। बढ़ती लागत और सीमित लाभ वाली पारंपरिक धान खेती के विकल्प के रूप में किसानों को वच और ब्राह्मी जैसे औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि किसान अब कम लागत में कई गुना अधिक लाभ अर्जित कर रहे हैं और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को नई दिशा मिल रही है।
23 गांवों के 147 किसानों ने अपनाई औषधीय खेती
योजना के तहत धमतरी, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर और रायपुर जिले के 23 गांवों के 147 किसानों ने लगभग 65 एकड़ भूमि पर औषधीय खेती शुरू की है। इनमें 63 किसान 39 एकड़ क्षेत्र में वच की खेती और 84 किसान 26 एकड़ क्षेत्र में ब्राह्मी का उत्पादन कर रहे हैं। यह बदलाव उन क्षेत्रों में देखने को मिला है जहां किसान पहले पूरी तरह धान उत्पादन पर निर्भर थे।
धमतरी जिला बना सफलता का मॉडल
इस पहल में धमतरी जिला सबसे आगे रहा है। यहां 16 गांवों के 90 किसानों ने 27.50 एकड़ भूमि पर वच और ब्राह्मी की खेती कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। रायपुर जिले के किसानों ने भी औषधीय खेती से बेहतर लाभ कमाया है। वहीं नारायणपुर, कोंडागांव और बस्तर जैसे आदिवासी क्षेत्रों में भी किसानों ने इस मॉडल को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है।
कम लागत में अधिक मुनाफा
पैडी डायवर्सन मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता कम निवेश में अधिक लाभ है। प्रति एकड़ खेती में लगभग 20 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि एक वर्ष में करीब एक लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। पारंपरिक धान खेती की तुलना में औषधीय खेती किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो रही है।
किसानों को मिल रहा सम्पूर्ण सहयोग
औषधि पादप बोर्ड किसानों को निःशुल्क पौधे, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और एक्सपोजर विजिट जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। साथ ही उत्पाद की शत-प्रतिशत खरीदी के लिए अनुबंधित संस्थाओं के माध्यम से बाजार की भी सुनिश्चित व्यवस्था की गई है, जिससे किसानों को बिचौलियों की समस्या से राहत मिली है।
आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
पैडी डायवर्सन मॉडल ने यह साबित किया है कि सही तकनीक, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और सुनिश्चित बाजार मिलने पर खेती को अत्यधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। इस योजना से जुड़े किसान अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं और छत्तीसगढ़ में कृषि विविधीकरण का नया अध्याय लिख रहे हैं।
