रायपुर, 07 मई। Tendu Leaf Collection 2026 : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण वर्ष 2026 के लिए बड़े पैमाने पर कार्य तेजी से जारी है। जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित द्वारा इस वर्ष 91,300 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसे हासिल करने के लिए सभी स्तरों पर तैयारी पूरी कर ली गई है।
75 समितियां, 69 लॉट—क्रेताओं की नियुक्ति पहले ही पूरी
संघ के प्रबंध संचालक के अनुसार जिले की 75 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के अंतर्गत 69 लॉट के लिए क्रेताओं की नियुक्ति पहले ही कर दी गई है। इससे संग्रहण और विपणन की प्रक्रिया को सुचारु और व्यवस्थित बनाया गया है।
प्रशिक्षण और तैयारी से मजबूत हुआ सिस्टम
संग्रहण कार्य को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए 23 से 27 फरवरी 2026 तक शाखा कटाई (शाखकर्तन) प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसके बाद 5 से 15 मार्च के बीच 786 फड़ों में शाखा कटाई का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिससे संग्रहण के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार हो सकीं।
समितियों को मिला 54 लाख से अधिक का भुगतान
पिछले 5 वर्षों के औसत संग्रहण (77,341.527 मानक बोरा) के आधार पर समितियों को 70 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से 54 लाख 13 हजार 907 रुपये का भुगतान किया गया है। यह राशि सीधे संबंधित समितियों के खातों में जमा की गई है, जिससे उनकी कार्यक्षमता और उत्साह में वृद्धि हुई है।
1.18 लाख से अधिक संग्राहक परिवार पंजीकृत
तेंदूपत्ता सीजन 2026 के लिए जिले के 1,18,646 संग्राहक परिवारों का पंजीयन ऑनलाइन भुगतान प्रणाली में किया गया है। संग्रहण कार्य को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए मैदानी अमले, जोनल अधिकारी, पोषक अधिकारी, फड़ अभिरक्षक और फड़मुंशी तैनात किए गए हैं।
संग्रहण शुरू, शुरुआती दिनों में ही 13 हजार बोरा पार
30 अप्रैल 2026 को आयोजित कार्यशाला में लिए गए निर्णय के अनुसार 3 मई से संग्रहण कार्य शुरू कर दिया गया। 4 मई तक ही 13,814.570 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण हो चुका है, जो लक्ष्य की ओर तेज प्रगति को दर्शाता है।
इस संग्रहण के बदले लगभग 7 करोड़ 59 लाख 80 हजार 135 रुपये का पारिश्रमिक करीब 44,900 संग्राहक परिवारों को दिया जाएगा। यह योजना वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभर रही है।
तेंदूपत्ता संग्रहण न केवल रोजगार का अवसर प्रदान कर रहा है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। डिजिटल भुगतान प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ी है और संग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो रहा है।

